मेघना ने कहा फिल्म के लिये माँ का नजरिया ठीक नहीं

मेघना गुलजार को भी अपने पिता की तरह कविताएं लिखने का शौक है। मेघना अभी एक बहुत अच्छी फिल्म 'तलवार' लेकर आई है यह फिल्म 2008 मे आरुषि हत्याकांड पर आधारित फिल्म है। मेघना से कुछ बाते की गई है जानते है उन बातों को। मेघना से पूछा गया कि आपने इस हत्याकांड पर फिल्म बनाने का कैसे सोचा तो उन्होने कहा कि इस हत्याकांड को लेकर बहुत सवाल थे उन सवालो को ही फिल्म मे दिखाया गया है। 

यह फिल्म एक सत्य घटना पर आधारित है इसलिए इस फिल्म को बनाने के लिये ज्यादा रिसर्च करना पड़ा था। मेघना से पूछा गया कि आप भी एक माँ है आपने फिल्म मे अपना नजरिया नहीं बताया तो मेघना ने कहा कि मेने फिल्म का निर्देशन किया था इसके एक पहलू मे लगता है कि लड़की के माता पिता ने लड़की को मार दिया लेकिन दूसरे पहलू मे लगता है कि उनके घर के नौकरो ने लड़की को मार दिया। इस फिल्म मे अपने माँ होने का नजरिया नहीं दिखा सकती थी।     

मेघना ने कहा कि इस फिल्म मे काम करने के लिये उनके दिमाग मे सबसे पहला नाम इरफान खान का था। उनके रोल को कोई और एक्टर अच्छे से नहीं कर सकता था। कलाकारो का चयन उनकी एक्टिंग देखकर किया गया है। मेघना ने कहा कि उन्होने आज तक जितनी भी फिल्मे बनाई है उनमे से कोई सी भी फिल्म उनके जीवन से नहीं जुड़ी है।  

मेघना से पूछा गया कि क्या आप अब भी कविताएं लिखती है तो उन्होने कहा कि वे अब भी कविताएं लिखती है। उन्हे जो भी घटना अच्छी लगती है वे उस पर कविता जरूर लिखती है। मेघना से पूछा कि आप फिल्मों के गाने क्यों नहीं लिखती है तो उन्होने कहा कि उनके पिता ने उनसे कहा है कि वे फिल्म की कहानी लिखेंगी और फिल्म के गाने उनके पिता से ही लिखवाएंगी। मेघना अपनी फिल्मों के गानो के लिये अपने पिता के पास ही जाती है। मेघना से पूछा गया कि उन्हे गुलजार साहब की कौनसी बात अच्छी लगती है तो उन्होने कहा कि उन्हे गुलजार साहब की सादगी अच्छी लगती है। 

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