अबूझ मुर्हूत में बजे ढोल, गूंजे कुर्यात सदा मंगलम

इंदौर : आज गुरूवार को देव प्रबोधिनी एकादशी है। इस अवसर पर जहां श्रद्धालुओं ने तुलसी विवाह को संपन्न किया वहीं अबूझ मुर्हूत के चलते मांगलिक कार्यों की भी धूम शहर में दिखाई दी। निजी स्तर पर तो विवाह आदि के कार्यक्रम हो ही रहे है वहीं विभिन्न समाजों द्वारा भी सामूहिक विवाह आयोजन संपन्न किये जा रहे है।

ज्योतिषियों के अनुसार देव प्रबोधिनी एकादशी को अबूझ मुर्हूत माना गया है। इस दिन बगैर किसी मुर्हूत निकाले विवाह से लेकर अन्य कोई भी मांगलिक कार्य संपन्न किये जा सकते है। शहर में देव प्रबोधिनी एकादशी का उल्लास सुबह से ही दिखाई दिया। इसे छोटी दीपावली और देव दिवाली भी कहा जाता है। शास्त्रोक्त मान्यता है कि देव प्रबोधिनी एकादशी पर ही देव जागते है अर्थात भगवान विष्णु धरती का भार वापस ले लेते है।

इसके पहले देव शयन एकादशी से लेकर देव प्रबोधिनी एकादशी तक चार माह तक धरती का भार भगवान भोलेनाथ के पास रहता है और भगवान विष्णु क्षीर सागर में शयन के लिये चले जाते है। देव प्रबोधिनी एकादशी पर तुलसी विवाह करने का भी शास्त्रोक्त महत्व बताया गया है। इसके चलते बाजारों में गन्ने बिकने का सिलसिला एक दिन पहले से ही शुरू हो गया था तथा गुरूवार की सुबह भी गन्ने के साथ पूजन सामग्री की खरीदी श्रद्धालुओं द्वारा की जाती रही।

वैवाहिक कार्यक्रमों को आयोजित होने वाले स्थानों पर ढोल, बैंड की स्वर लहरी बिखर रही है तो वहीं सामूहिक विवाह कार्यक्रमों में कुर्यात सदा मंगलम की आवाज गूंजित है।

देवप्रबोधनी एकादशी पर होता है तुलसी का पूजन

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