नोटबंदी मोदी का तुगलकी फरमान

नई दिल्ली : केंद्र सरकार द्वारा 500 रूपए और 1000 रूपए के नोट बंद किए जाने के बाद विपक्ष सरकार की आलोचनाऐं करने में लगा है। इस मामले में विपक्ष ने सरकार को संसद, सड़क और राष्ट्रपति भवन के ही साथ हर मोर्चे पर घेर लिया है। आज संसद का शीतकालीन सत्र प्रारंभ होने के बाद राज्यसभा में कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने सरकार को घेर लिया तो दूसरी ओर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने दल के 44 सांसदों और कुछ अन्य विरोधी दलों के साथ मिलकर संसद से राष्ट्रपति भवन तक मार्च निकाला।

इस मामले में विपक्षियों ने महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भेंट भी की। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी और नेशनल कांफ्रेंस के प्रमुख व जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला प्रमुखतौर पर मार्च में शामिल हुए। इस दौरान आम आदमी पार्टी के नेता और शिवसेना के नेता भी विरोधियों के साथ मौजूद रहे। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह प्रयास मोहम्मद बिन तुगलक की तरह है।

नोटबंदी के विरूद्ध तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी के नेतृत्व में विभिन्न दलों के प्रतिनिधिमंडल द्वारा राष्ट्रपति डाॅ. प्रणब मुखर्जी को ज्ञापन सौंपा गया। शिवसेना और आम आदमी पार्टी के सांसद मार्च में मौजूद थे। शिवसेना की ओर से सांसद संजय राउत ने कहा कि नोटबंदी का निर्णय शिवसेना से पूछकर नहीें हुआ है।

शिवसेना लोकहित पर किसी के भी साथ हो सकती है। उन्होंने कहा कि पहले भी ममता बनर्जी शिवसेना के साथ रही हैं उनका कहने का तात्पर्य था कि जनता की भलाई के लिए मुलायम सिंह यादव और ममता बनर्जी या किसी ओर के साथ जाने का शिवसेना पर विपरीत असर नहीं होता है।

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