मनमोहन सिंह ने लिया कोयला ब्लाक आवंटन का फैसला -गुप्ता

नई दिल्ली : पूर्व कोयला सचिव हरीश चंद्र गुप्ता ने अदालत में कहा है कि झारखंड की राजहारा उत्तरी कोयला खदान के आवंटन पर अंतिम फैसला तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लिया था। गुप्ता को कोयला ब्लॉक आवंटन के चार अलग-अलग मामलों में पिछले हफ्ते जमानत मिली है। गुप्ता ने कहा कि मनमोहन सिंह ही उस वक्त कोयला मंत्री थे और कोयला ब्लॉक आवंटित करने का पूरा और अंतिम अधिकार उन्हीं के पास था। गुप्ता के वकील बी.एस.माथुर ने सूत्रों से कहा कि छानबीन समिति (स्क्रीनिंग कमेटी) के अध्यक्ष की हैसियत से गुप्ता से यही उम्मीद की जाती थी कि वह सिफारिशों को कोयला मंत्री तक पहुंचा दें। स्क्रीनिंग कमेटी तो महज एक अनुशंसा करने वाली समिति थी।

माथुर ने कहा कि गुप्ता ने सरकार के बनाए दिशा-निर्देशों के मुताबिक ही काम किया। कोयला ब्लॉकों के आवंटन की प्रक्रिया में उनका कोई भी नाजायज मकसद नहीं था। उन्होंने कहा कि गुप्ता ने 33 साल तक एक स्वच्छ छवि के साथ सेवा की है। वह अपनी ईमानदारी के लिए जाने जाते थे। गुप्ता के खिलाफ नौ अलग-अलग मामले चल रहे हैं। खास बात यह है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने उनके खिलाफ तीन मामलों में आरोप पत्र दायर किया है।

लेकिन, मामले की आगे की जांच से निकलने वाले तथ्यों के आधार पर विशेष न्यायाधीश भरत पराशर ने उन्हें नौ अलग-अलग मामलों में नौ अलग-अलग तारीखों पर तलब किया। बीते हफ्ते उन्हें कोयला ब्लॉक आवंटन के चार मामलों में जमानत मिल गई। अदालत ने उन्हें 4 सितंबर को एक अन्य कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पेश होने के लिए समन जारी किया है। सीबीआई ने गुप्ता के खिलाफ जिन तीन मामलों में आरोप पत्र तैयार किया है, उन सभी में गुप्ता को जमानत मिल गई थी।

लेकिन, झारखंड के राजहारा उत्तरी कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में 31 जुलाई को अदालत ने उनके खिलाफ आरोप तय कर दिए। गुप्ता के अलावा कोयला मंत्रालय के दो अन्य अधिकारियों के.एस.क्रोप्हा और के.सी. सामरिया के खिलाफ भी चार मामले चल रहे हैं। राज्यसभा सांसद विजय दर्दा और उनके बेटे देवेंद्र दर्दा के खिलाफ कोयला ब्लॉक आवंटन के तीन अलग-अलग मामले चल रहे हैं। आज की तारीख तक सीबीआई कोयला ब्लॉक के 15 मामलों में अपनी रपट दे चुकी है। गुप्ता इन 15 में से 9 मामलों में आरोपी हैं।

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