मणिपुर में फूंके सांसदों और विधायकों के घर, 3 की मौत, कई घायल

By Kapil Mali
Sep 01 2015 11:22 AM
मणिपुर में फूंके सांसदों और विधायकों के घर, 3 की मौत, कई घायल

चूड़चंदपुर ​: मणिपुर विधानसभा में पारित तीन विधेयकों के विरोध में राज्य में भड़की हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। मणिपुर के चूड़चंदपुर में सोमवार रात हिंसा भड़कने के बाद कानून एवं व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए यहां अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि हिंसक भीड़ में जनजातीय छात्र संगठन के सदस्य भी शामिल थे, जो मणिपुर सरकार द्वारा पारित तीन महत्वपूर्ण विधेयकों का विरोध कर रहे थे। इन विधेयकों में मणिपुर जन संरक्षण विधेयक 2015, मणिपुर भू-राजस्व एवं भूमि सुधार (सातवां संशोधन) विधेयक, 2015 और मणिपुर दुकान एवं प्रतिष्ठान (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2015 शामिल हैं। ये तीनों विधेयक सोमवार को विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित कर दिए गए।

इससे पहले सत्तारूढ़ कांग्रेस ने 25 अगस्त को इनर लाइन परमिट सिस्टम (जेसीआईएलपीएस) के लिए संयुक्त समिति के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए थे ताकि इन तीन कानूनों से राज्य के मूल निवासियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इन तीन विधेयकों के विरोध में प्रदर्शन कर रही उग्र भीड़ ने पांच कांग्रेसी सांसदों के आवासों पर धावा बोल दिया। इन सासंदों में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री फुंगजाथांग तोनसिंग और बाहरी मणिपुर निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सासंद थांगसोई बैते शामिल हैं। भीड़ ने चूड़चंदपुर के उपायुक्त लुनमिंथांग होआकिप के वाहन में भी आग लगा दी और आग बुझाने आए दमकल के वाहनों को रोक दिया। जिसके बाद पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा।

हालांकि, उग्र भीड़ के हमले के वक्त सांसद अपने आवास पर नहीं थे। सभी सांसद विधानसभा के विशेष सत्र में हिस्सा लेने के लिए राजधानी इंफाल में थे। मणिपुर के जनजातीय समूह राज्य विधानसभा में पारित तीन विधेयकों का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इन विधेयकों से मणिपुर हिल पीपुल एडमिनिशट्रेशन रेग्युलेशन अधिनियम, 1947 के कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं का हनन होता है, जो मणिपुर के पहाड़ी क्षेत्रों में बसने वाले जनजातीय लोगों के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया था।