सावन के हर मंगलवार होंगे मंगला गौरी व्रत, जानिए कथा

Jul 07 2020 06:00 PM
सावन के हर मंगलवार होंगे मंगला गौरी व्रत, जानिए कथा

सावन के महीने में मां गौरी का भी व्रत रखा जाता है. जी हाँ, सावन के महीने में मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है और यह व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए करती है. अब आज हम आपको बताने जा रहे हैं इस व्रत की कथा.

मंगला गौरी व्रत की कथा - एक समय की बात है, एक शहर में धरमपाल नाम का एक व्यापारी रहता था. उसकी पत्नी काफी खूबसूरत थी और उसके पास काफी संपत्ति थी. लेकिन उनके कोई संतान नहीं होने के कारण वे काफी दुखी रहा करते थे. ईश्वर की कृपा से उनको एक पुत्र की प्राप्ति हुई लेकिन वह अल्पायु था. उसे यह श्राप मिला था कि 16 वर्ष की उम्र में सांप के काटने से उसकी मौत हो जाएगी. संयोग से उसकी शादी 16 वर्ष से पहले ही एक युवती से हुई जिसकी माता मंगला गौरी व्रत किया करती थी. परिणामस्वरूप उसने अपनी पुत्री के लिए एक ऐसे सुखी जीवन का आशीर्वाद प्राप्त किया था जिसके कारण वह कभी विधवा नहीं हो सकती थी. इस वजह से धरमपाल के पुत्र ने 100 साल की लंबी आयु प्राप्त की.

इस कारण से सभी नवविवाहित महिलाएं इस पूजा को करती हैं तथा गौरी व्रत का पालन करती हैं तथा अपने लिए एक लंबी, सुखी तथा स्थायी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं. जो महिला उपवास का पालन नहीं कर सकतीं, वे भी कम से कम इस पूजा तो करती ही हैं. इस कथा को सुनने के बाद विवाहित महिला अपनी सास तथा ननद को 16 लड्डू देती है. इसके बाद वे यही प्रसाद ब्राह्मण को भी देती है. इस विधि को पूरा करने के बाद व्रती 16 बाती वाले दीये से देवी की आरती करती है. व्रत के दूसरे दिन बुधवार को देवी मंगला गौरी की प्रतिमा को नदी या पोखर में विसर्जित कर दी जाती है. अंत में मां गौरी के सामने हाथ जोड़कर अपने समस्त अपराधों के लिए एवं पूजा में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें. इस व्रत और पूजा को परिवार की खुशी के लिए लगातार 5 वर्षों तक किया जाता है. जी दरअसल शास्त्रों के मुताबिक यह मंगला गौरी व्रत नियमानुसार करने से प्रत्येक मनुष्य के वैवाहिक सुख में बढ़ोतरी हो जाती है और पुत्र-पौत्रादि मिलते हैं.

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