मकर संक्रांति: इस नवग्रह मंदिर में सबसे पहले जाती है सूर्य की किरण

Jan 14 2021 10:00 AM
मकर संक्रांति: इस नवग्रह मंदिर में सबसे पहले जाती है सूर्य की किरण

खरगोन: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में स्थित अतिप्राचीन नवग्रह मंदिर का मकर संक्रांति पर काफी महत्व होता है। जी दरअसल मकर संक्रांति पर यहां सूर्य देव की प्रतिमा पर सूर्य की पहली किरण पड़ती है। कहा जाता है यह देश का दूसरा ऐसा मंदिर है, जहां सूर्य की पहली किरण आती है। वैसे इस मंदिर में चारों ओर नवग्रहों की प्राचीन मूर्तियां रखी गई हैं और यहीं वजह है कि देश भर से श्रद्धालु यहां भगवान के दर्शन के लिए आते हैं। मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में स्थित यह अतिप्राचीन नवग्रह मंदिर का मकर संक्रांति पर काफी महत्व है। वैसे मकर संक्रांति के दिन प्राचीन नवग्रह मंदिर में सूर्योदय से पहले ही भक्तों की भीड़ जमा हो जाती है।

कहा जाता है मकर संक्रांति पर सूर्य मंदिर में सूर्य की पहली किरण मंदिर के गुंबद से होते हुए भगवान सूर्य की मूर्ति पर पड़ती है। हर साल मकर संक्रांति के दिन इस मंदिर में सुबह 3 बजे से लोगों की भीड़ लग जाती है। इस मंदिर के पंडित लोकेश जागीरदार ने बताया कि, 'मकर संक्रांति सूर्य की अगवानी का पर्व होता है। नवग्रह मंदिर सूर्य प्रधान है। यहां गर्भ गृह में सूर्य की मूर्ति बीच में विराजित है। मूर्ति के आसपास अन्य ग्रह हैं।' इसके अलावा यह भी मान्यता है कि, 'मकर संक्रांति पर सूर्य की पूजा की जाती है तो नवग्रह की कृपा होती है। वर्षभर के लिए हमें ग्रहशांति का फल मिलता है। प्राचीन ज्योतिष के सिद्धांतों के अनुसार मंदिर की रचना की गई है।'

यहाँ मंदिर में प्रवेश करते समय 7 सीढ़ियां हैं जो सात वार का प्रतीक मानी जाती है। वैसे ब्रह्मा विष्णु स्वरूप के रूप में मां सरस्वती, श्रीराम और पंचमुखी महादेव के दर्शन होते हैं। उसके बाद गर्भगृह में जाने के लिए जहां 12 सीढ़ियां उतरना होती है जो 12 महीने का प्रतीक हैं। कहते हैं इस प्रकार से सात वार, 12 महीने, 12 राशियां और नवग्रह इनके बीच में हमारा जीवन चलता है और उसी आधार पर मंदिर की रचना की गई है।

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