महात्मा गांधी के पौत्र गुजार रहे चेरिटेबल अस्पताल में जीवन

सूरत: डांडी मार्च के दौरान महात्मा गांधी की लाठी थामकर उन्हें आंदोलन में ले जाने के लिए सहारा और जोश देेने वाले बच्चे को आज भी याद किया जाता है लेकिन आप जानते हैं कि यह बच्चा कौन था। आपको लग रहा होगा कि देश के लिए महात्मा गांधी के साथ आंदोलन में भाग लेने वाला यह बच्चा अब शायद स्वाधीनता संग्राम सेनानी जैसा सम्मान पा रहा होगा या स्वाीधन भारत के किसी सरकारी विभाग से सेवानिवृत्त हुआ होगा।

मगर ऐसा नहीं है। महात्मा गांधी का यह पौत्र तो 87 वर्ष में भी आशियाने के लिए तरस रहा है। इस व्यक्ति को कनु रामदास गांधी के नाम से जाना जाता है। दरअसल ये वृद्धावस्था आश्रमों में खानाबदोशी के हालात में गुजारने के लिए मजबूर हैें। उनकी पत्नी के भी बुरे हाल हैं। 90 वर्षीय पत्नी शिवलक्ष्मी कनु गांधी कई तरह की बीमारियों से ग्रस्त हैं। 

गुजरात का नेता या मंत्री साबरमती के संत के वंशज का हाल जानने और पूछने तक नहीं आया। दरअसल कनु भाई को कोई संतान नहीं है। दरअसल राधास्वामी मंदिर के प्रबंधकों द्वारा शिव ज्योति चैरिटेबल चिकित्सालय में उन्हें भर्ती करवाया गया था। तब से ही चेरीटेबल चिकित्सालय में उन्हें उपचार दिया जा रहा है। दरअसल कनु भाई की सहायता के लिए 21 हजार रूपए की मदद के लिए उनके प्रपौत्र धीमंत बाधिया ने कहा कि वे भी अब सूरत नहीं आ सकते हैं।

गौरतलब है कि कनु भाई नासा में और अमेरिकी रक्षा विभाग में वैज्ञानिक के तौर पर काम करते थे। उनकी पत्नी शिवलक्ष्मी बोस्टन के बायोमेडिकल रिसर्च इंस्टीट्टुट में प्रोफेसर और रिसर्चर थीं। जब वे वर्ष 2014 में भारत लौटे तो उनके पास कोई ठिकाना नहीं था। वे आश्रमों में स्थान तलाशते रहे और अब दोनों ही बीमारी की दशा में हैं।

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