वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए सार्थक हैं गांधी के सिद्धांत

बंदे में था दम वंदेमातरम्, बंदे में था दम वंदेमातरम् इस गीत के बोल सुनते ही आपके जेहन में घुटनों तक धोती पहने हुए और एक लाठी हाथ में लिए हुए व्यक्तित्व की छवि का निर्माण होता है। आखिर किस तरह से इस व्यक्ति ने जीवन के समग्र को छुआ। आखिर इतने लोगों के बीच यह कैसे छाया रहा। इसका उत्तर केवल और केवल राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के व्यक्तित्व से ही मिल सकता है। यही नहीं महात्मा गांधी एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने सत्य, अहिंसा, त्याग, क्षमा, अपरिग्रह के माध्यम से लोगों को जीवन का संदेश दिया।

हालांकि उन्होंने ब्रिटिश राज के विरूद्ध अहिंसात्मक रास्ते से संघर्ष किए जाने की बात कही और इसके लिए प्रयास करते रहे। महात्मा गांधी मूल रूप से अहिंसा के पूजक थे। महात्मा गांधी ने अपनी पुस्तक हिंद स्वराज में कई बातों का समावेश किया है। जिसमें उन्होंने कई बातों का उल्लेख किया है। हिंद स्वराज असली मायने में भारत में स्वाधीन राज्य स्थापना की कल्पना रही है।

महात्मा गांधी औद्योगिकरण के आदि हो जाने के विरोधी थे आज दुनिया औद्योगिक क्रांति के दुष्परिणाम देख रही है। महात्मा गांधी ने एक और संदेश दिया है जिसमें उन्होंने मितव्ययिता को महत्व दिया है। यदि हम मितव्ययी हों और जीवन में बचत करें तो आज वैश्विकस्तर पर जो आर्थिक बदहाली का दौर है उसका सामना हम कर सकते हैं। महात्मा गांधी ने अहिंसा को महत्वपूर्ण बताया था। वर्तमान में विभिन्न देशों के बीच सीमा मसलों और अपने राज्य विस्तार के लिए जो अशांति और हिंसा फैलाई जा रही है। वह किसी के हित में नहीं है। इसकी बजाय सभी समस्याओं का हल अहिंसा के रास्ते से निकाला जाना बेहद जरूरी माना जाता है।

इससे शांति और विकास की स्थापना की जा सकती है। मोहनदास करमचंद गांधी को उनके योगदान के लिए जाना जाता है। जिस तरह से उन्होंने सूतकातकर खादी को प्रोत्साहित किया। यह एक अनुकरणीय पहल है। खादी को प्रोत्साहित कर उन्होंने स्वदेशी को प्रेरित किया। महात्मा गांधी द्वारा वर्ष 1942 में असहयोग आंदोलन को प्रारंभ किए जाने का असर भी जबरदस्त रहा।

अंग्रेजी सरकार को इस आंदोलन से अपनी जड़ें हिलती हुई नज़र आईं। आखिर हमें यह विचार करना होगा कि आज भी महात्मा गांधी के बताए हड़ताल और अनशन का असर बहुत होता है। यही नहीं उन्होंने उपवास को लेकर भी काफी कुछ कहा। उपवास से व्यक्ति की आत्मशुद्धि होती है और व्यक्ति नवीन उर्जा को ग्रहण करता है।

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