अंग्रेजों को महालक्ष्मी ने दिखाई थी समुद्र की राह

दीपावली हो और देवी लक्ष्मी की बात न की जाए ऐसा तो हो ही नहीं सकता है। तो हम बात करते हैं मुंबई के बेहद लोकप्रिय श्री महालक्ष्मी मंदिर की। जी हां, आखिर यह मंदिर इतना आकर्षक क्यों हैं यह मंदिर कैसे बना और किसने बनवाया कुछ इस तरह की बातों को लेकर हम आज जानकारी लेते हैं। जी हां, हम अपने पाठकों व दर्शकों को लोकप्रिय महालक्ष्मी मंदिर से रूबरू करवा रहे हैं वे घर बैठे श्री महालक्ष्मी मंदिर, मुंबई को लेकर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और देवी मां महालक्ष्मी का स्मरण कर सकते हैं।

श्री महालक्ष्मी मंदिर मुंबई के सर्वाधिक लोकप्रिय धर्मस्थलों में से एक है। यहां श्री महालक्ष्मी साक्षात् विराजमान हैं। मंदिर के एक भाग से समुद्री किनारा बिल्कुल करीब आता है। यहां पर जब समुद्री लाटें मंदिर को छूने का प्रयास करती हैं तो यह नज़ारा बेहद सुंदर लगता है। हालांकि अब सुरक्षा कारणों के चलते इन नज़रों को कोई भी कैमरे में कैद नहीं कर पाता है। दरअसल यह मंदिर देसाई मार्ग के पास है।

मंदिर में सुंदर नक्काशी की गई है। मंदिर का इतिहास बेहद ही सुंदर है। दरअसल ब्रिटिश राज में वर्ली क्षेत्र को महालक्ष्मी क्षेत्र से जोड़ने के लिए ब्रीचकेंडी मार्ग बनाने की तैयारी थी मगर समुद्र की लहरों का सामना करने का साहस ब्रिटिशों के पास नहीं था। ऐसे में इस काम के ठकेदार रामजी शिवाजी को देवी मां लक्ष्मी ने स्वप्न में दर्शन दिए और समुद्रं तल से देवियों की तीन प्रतिमाऐं निकालीं मंदिर में इन प्रतिमाओं की प्रतिष्ठाना की गई।

इसके बाद ब्रीच कैंडी मार्ग का निर्माण हुआ। इस तरह से बाद में माता की प्रतिमाओं को अन्य लोगों द्वारा पूजा जाने लगा। तीनों प्रतिमाओं को सोने और मोतियों के साथ आभूषणों से सजाया गया। इसके बाद यह मंदिर मुंबई का प्रमुख मंदिर बन गया वैसे मुंबई का नाम मुंबा देवी के नाम पर रखा गया है लेकिन यह मंदिर भी अपनी लोकप्रियता और तेजस्वीता के कारण सभी के आकर्षण का केंद्र है। यहां दीपावली पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। बड़े पैमाने पर मुंबईवासी, देशी विदेशी पर्यटक यहां पर दर्शन के लिए उमड़ते हैं।

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