महागठबंधन: दो सवाल अभी भी दिक्कत दे रहे है

बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन को एक मात्र विकल्प के तौर पर देखने के बाद लोकसभा चुनाव 2019 में विपक्षी पार्टियों ने एक होने का फैसला कर लिया है और मंथन जारी है. गठबंधन के जरिये शक्ति संचय का काम 7 राज्यों में मुमकिन दिख रहा है. उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, झारखंड, तमिलनाडु और जम्मू-कश्मीर में मिलाकर 252 लोकसभा सीटें हैं. जिनमे से बीजेपी के पास करीब 150 है.

 एक मुख्य विपक्षी पार्टी के सीनियर नेता ने कहा, 'इसका मतलब यह है कि हमारा ध्यान दोबारा ज्यादा-से-ज्यादा राज्यों में चुनाव-पूर्व गठबंधन पर है. बचे हुए राज्यों में चुनाव के बाद गैर-बीजेपी गठबंधन की संभावनाएं तलाशी जाएंगी.' महागठबंधन की सबसे बड़ी दिक्कत है मुखिया कौन और सीटों का बटवारा कैसे हो. ये दो सवाल जितनी जल्दी सुलझेंगे उतना बेहतर है. मगर ये अभी तक उलझे हुए ही है और बीजेपी ने तैयारी शरू कर दी है. सीट बंटवारे के समय बड़ा दिल रखना सब के बुते की बात नहीं है. यूपी में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन की अगुवाई करेंगी जबकि कांग्रेस को कुछ अन्य दलों के साथ कम सीटों के साथ समझौता करना पड़ सकता है.

यूपी की 80 सीटों में 71 पर बीजेपी ने 2014 में जीत हासिल की वही बिहार NDA का कब्ज़ा 40 में से 39 सीट पर है. यहाँ आरजेडी, कांग्रेस, शरद यादव का गुट और जीतनराम मांझी आरजेडी के बैनर तले आ सकते है. बहरहाल मामला तभी सुलझेगा जब मुखिया के नाम पर सहमति बने और सीटों के बटवारे पर भी सभी एक साथ आये. 

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