महाभारत : दुर्योधन ने भीम को दिया जहर

पाण्डु की मृत्यु और माद्री के देहत्याग के बाद कुंती अपने पांचों पुत्रों के साथ वापस हस्तिनापुर लौट आई हैं. परन्तु दुर्योधन ने उन्हें स्वीकार नहीं किया. ऋषि वेदव्यास को हस्तिनापुर में होने वाली घटनाओं का आभास हो गया था. वहीं इसीलिए वो अपनी माता सत्यवती के प्रति ममता का अंतिम ऋण चुकाने हस्तिनापुर पधारे. वहीं क्यूंकि उन्हें पता था की सत्यवती हस्तिनापुर की दुर्दशा सहन नहीं कर पाएंगी.धृतराष्ट्र और गांधारी, दुर्योधन को ये समझाने का प्रयत्न करते रहे कि युधिष्टर उसके बड़े भाई हैं, परन्तु दुर्योधन ने ये मानने से इनकार कर दिया. वहीं गांधारी, कुंती के पास आती है उसका हाल चाल पूछती हैं और साथ ही दुर्योधन के दुराचार की माफी भी मांगती है. गांधारी को डर है कि कहीं दुर्योधन शकुनि के बहकावे में ना आ जाए पर उसे ये नहीं पता की शकुनि दुर्योधन के साथ-साथ धृतराष्ट्र के कान भी भर रहे हैं.भीष्म भी गंगा किनारे हस्तिनापुर के भविष्य को लेकर बेहद चिंतित हैं और विदुर से अपनी परेशानी बांटते हैं. 

इसके साथ ही विदुर को आदेश देते हैं की वो पांचों पांडव को गुरु कृपाचार्य के यहां छोड़कर आएं, जिससे वे राजधर्म की विद्या ग्रहण कर सकें. इतना ही नहीं भीष्म अपनी गंगा मां से भी अपना दुख व्यक्त करते हैं और कहते हैं की वो पांचों पांडवों को स्नेह और आशीर्वाद के सिवा कुछ नहीं दे सकते. इसपर मां गंगा उन्हें समझती हैं और उन्हें उनके कर्म याद दिलाती हैं. एक तरफ विदुर पांचों पांडवों के साथ गुरु कृपाचार्य के पास जाते हैं, जहां दुर्योधन राजधर्म की शिक्षा ग्रहण कर रहा था. पांचों पांडवों को देख दुर्योधन गुस्से से खींज जाता हैं.जब भीम ने अपना परिचय दिया तो नागराज उसपर लाड़ जताने लगे और बताया कि कुंती उनकी पुत्री की पुत्री हैं.इसके साथ ही नागराज ने भीम को सुधा रास पिलाया और वापस राजमहल जाने का आदेश दिया. वहीं यहां भीम के ना आने पर कुंती का बेमन चैन था कि तभी भीम आ जाते हैं. उन्हें देखकर कुंती खुशी से फूली नहीं समाती. भीम के वापस आने का समाचार सुनकर दुर्योधन एक पल के लिए चकित रह गया फिर उसने नई योजना बनानी शुरू की. भीम को अब दुर्योधन पर बहुत गुस्सा आया और उसने दुर्योधन को सबक सिखाने की ठानी लेकिन युधिष्टर ने उसे रोक लिया और कुलगुरु की शिक्षा याद दिलाई.

आखिरकार विदुर को दुर्योधन का भीम को जहर देने वाली बात उड़ते-उड़ते मिल ही गई और ये बात उन्होंने भीष्म को बताई. एक पल के लिए तो भीष्म को यकीन नहीं हुआ लेकिन वो दुर्योधन को भली भांति जानते हैं, इसलिए उनका मन पांडवों के लिए दुखी हुआ और वो अब जान चुके हैं कि दुर्योधन की इस राजनीति के पीछे कोई और नहीं बल्कि शकुनि है.भीम के जीवित लौटने पर शकुनि ने दुर्योधन और दुशासन को दो-चार दिन दम साधकर बैठने के लिए कहा और ये भी कहा कि अगर कोई भी पांडव कुछ कहे तो उसमें सौ बातें लगाकर धृतराष्ट्र से शिकायत करो. दुर्योधन ने ऐसा ही किया. वहीं उसने और दुशासन ने वन में एक आम का पेड़ देखा और उसे खाने की लालसा जताई. वहीं उसी वक्त भीम वहां पहुंच गया और उसने दुर्योधन को अपनी पीठ खुजाने को कहा लेकिन दुर्योधन, दुशासन को लेकर आम के पेड़ पर चढ़ गया. बस फिर क्या था, भीम ने दुर्योधन को सबक सिखाने के लिए, पेड़ के तने से ही अपनी पीठ खुजानी शुरू कर दी और पेड़ गिरा दिया. ये शिकायत लेकर दुर्योधन, धृतराष्ट्र और गांधारी के पास गया जहां सच जानकार गांधारी ने दुर्योधन को समझाया और भीम को गले लगा लिया.

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