चौसर के खेल में युधिष्ठिर ने द्रौपदी को हारा, हुआ चीर हरण

महाभारत के अब तक के एप‍िसोड में दिखाया गया कि पांडवों को चौसर खेलने का निमंत्रण मिलता है और वे इस निमंत्रण को स्वीकार कर लेते हैं. वहीं भीष्म, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य और विदुर इस द्यूत क्रीड़ा का परिणाम जानते हैं लेकिन दुर्योधन के हठ के आगे विवश हैं और चुप्पी साधे इस क्रीड़ा में मौजूद  हुए हैं.युधिष्ठिर अपने आप को दांव पर लगा देता है और हार जाता है. इसके साथ ही द्यूत क्रीड़ा हारने के बाद युधिष्ठिर इस क्रीड़ा को समाप्त करने के लिए कहते हैं क्योंकि अब उनके पास दांव पर लगाने के लिए कुछ नहीं है, लेकिन दुर्योधन अब भी अपने अपमान का बदला लेना चाहता है. इसीलिए वो द्रौपदी को दांव पर लगाने को कहता है, ये सुनकर विदुर को खड़ा होना ही पड़ा और उसने धृतराष्ट्र को अपने बेटे दुर्योधन को त्यागने को कहता है जिसने हस्तिनापुर की कुलवधू का भारी सभा में अनादर किया, ये सुन दुर्योधन आग बबूला हो गया और उसने विदुर का अपमान कर दिया और धृतराष्ट्र ने कुछ नहीं कहा. 

इसके साथ ही युधिष्ठिर को विवश होकर द्रौपदी को दांव पर लगाना पड़ा और वो उसे भी हार गया. दुर्योधन तो अपने अपमान का बदला लेना चाहता था इसलिए उसे जीतकर उसने द्रौपदी को इस सभा में लाने का आदेश दिया.दुशासन द्रौपदी के कक्ष में आता है और द्रौपदी का अनादर करते हुए उसके बाल पकड़कर उसे घसीटता हुआ द्यूत क्रीड़ा गृह ले जाता है. वहीं द्रौपदी बहुत कोशिश करती है लेकिन कुछ नहीं कर पाती. वहीं अपनी कुल मर्यादा को खींचता हुआ दुशासन क्रीड़ा गृह में द्रौपदी को ले आता है. द्रौपदी को देख दुर्योधन, दुशासन से कहता है कि वो उसे दुर्योधन की जंघा पर बैठाए. वहीं भीम ये अपमान सह ना सका और उसने दुर्योधन को वचन दिया कि वो उसकी जंघा तोड़ देगा. द्रौपदी दुशासन का हाथ छुड़ाकर ज्येष्ठ पिताश्री, भीष्म पितामह, काकाश्री विदुर, कृपाचार्य और द्रोणाचार्य की तरफ देखती है,सभी आंखों में आंसू लिए और नजरें झुकाए बैठे हैं. तभी द्रौपदी रोते हुए भीष्म पितामह से आशीर्वाद मांगती है. 

आपकी जानकरी के लिए बता दें की भीष्म पितामह चुपचाप बैठे इस अपमान का घूंट पी रहे हैं. इसके साथ ही द्रौपदी सबसे एक-एक कर सवाल पूछती है, लेकिन उसको कोई उत्तर नहीं मिलता. जब सब उसे विवश दिखते हैं तो द्रौपदी युधिष्ठिर से सवाल करती है कि वो कैसे अपनी पत्नी को दांव पर लगा सकते हैं. इसपर भीम भी अपने ज्येष्ठ भ्राता युधिष्ठिर से कहता है कि अगर उस जगह युधिष्ठिर ना होकर कोई और होता तो उनकी भुजाएं उखाड़कर फेंक देता.वहीं कर्ण भी द्रौपदी से कहता है कि पांच की पत्नी होने के साथ-साथ छठें को अपना बनाने में कोई हर्ज नहीं होना चाहिए, कर्ण ने द्रौपदी को वेश्या तक बोल दिया. जिसे सुनकर पांचों पांडव को क्रोध आया परन्तु युधिष्ठिर ने युद्ध होने से रोक लिया. इसपर अर्जुन कर्ण को वचन देता है कि वो इस अपमान का बदला एक दिन उससे ज़रूर लेगा. फिर दुर्योधन दुशासन को आदेश देता है द्रौपदी को नग्न करने की.

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