'बंगाल हिंसा' से लेकर 'स्वर्ण मंदिर' में लिंचिंग तक... देखें 2021 के 12 महीनों की 12 बड़ी ख़बरें

साल 2021 विदा हो रहा है और 2022 आने वाला है। इस बीच सभी लोग नए साल में ये उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाला ये साल सबके जीवन में खुशियां लाए और पिछले 2 सालों से जारी महामारी का कहर ख़त्म हो। यह साल 2021 की तरह शुरू न हो, जब दिल्ली की सरहदें ब्लॉक थी, कोरोना बढ़ चला था और ऑक्सीजन तथा मेडिकल इक्विपमेंट्स के लिए मारा मारी होने लगी थी। इस साल किसान आंदोलन तो पूरे साल चर्चा में रहा, जहाँ कभी हत्या, कभी बलात्कार, तो कभी हिंसा की ख़बरें आती रहीं। हालांकि, नवंबर में PM मोदी ने कृषि कानून वापस लेकर किसानों से आंदोलन ख़त्म करने के लिए कहा, जिसके बाद दिसंबर में आंदोलन ख़त्म हो गया। ​इससे पहले कि नया साल शुरू हो, एक नज़र हमें उन ख़बरों में डाल लेना चाहिए, जो 2021 में सुर्खियां बनीं और राजनेताओं से लेकर आम आदमी ने भी जिसपर जमकर चर्चा की। 

26 जनवरी हिंसा: नवंबर 2020 से शुरू हुआ किसान आंदोलन जनवरी 2021 तक दिल्ली की हर बॉर्डर पर डेरा डाल चुका था। राकेश टिकैत जैसे किसान नेता जगह-जगह घोषणा कर रहे थे कि 26 जनवरी को लोग ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे और गणतंत्र दिवस पर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन करेंगे। सरकार और प्रशासन की मनाही के बाद भी प्रदर्शनकारी नहीं माने और ‘बक्कल उतारने वाली धमकियाँ’ देकर 26 जनवरी 2021 को सैंकड़ों ट्रकों के साथ राजधानी में घुस गए। इस ट्रेक्टर मार्च के दौरान दिल्ली में हिंसा भड़क गई। दिल्ली की सड़कों पर जहाँ-तहाँ उत्पात मचाया गया। भीड़ जब लाल किले पहुँची तो वहाँ भी जमकर हिंसा हुई। रास्ते में तिरंगे का अपमान किया गया। उसे रौंदा गया। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस दिन की झड़प में 300 के करीब पुलिस वाले जख्मी हुए थे।

टूलकिट मामला: किसान आंदोलन की आड़ लेकर भारत के खिलाफ़ रची गई साजिश को साबित करने वाले दस्तावेज़ ‘टूलकिट’ का भंडाफोड़ फरवरी माह में हुआ था। ग्रेटा थनबर्ग के एक ट्वीट से इस टूलकिट का खुलासा हुआ था। इस टूलकिट को योजनाबद्ध तरीके से किसानों की आड़ लेकर भारत सरकार को बदनाम करने के लिए तैयार किया गया था। इस खुलासे के बाद काफी समय तक टूलकिट का विवाद छाया रहा और आरोप-प्रत्यारोप लगते रहे।

मनसुख हिरेन हत्या मामला: फरवरी महीने में जो  विस्फोटक सामग्री से भरी हुई स्कॉर्पियों मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर खड़ी मिली थी, वो मनसुख हिरेन की थी। मनसुख का शव 4-5 मार्च 2021 को बरामद हुआ थी। शुरू में कहा गया कि हिरेन ने ख़ुदकुशी की। लेकिन बाद में पता चला कि उसकी हत्या की गई थी। इसी हत्या की एंगल के जाँच के दौरान महाराष्ट्र के पुलिसकर्मी सचिन वाजे का नाम सुर्ख़ियों में आया और पता चला कि वो हिरेन से निरंतर संपर्क में था।

अनिल देशमुख का इस्तीफा: एंटीलिया मामले और मनसुख हिरेन मर्डर केस की जाँच के क्रम में महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख पर 100 करोड़ रुपए की वसूली के इल्जाम लगे, जिसके बाद जगह-जगह उनका जमकर विरोध हुआ और आख़िरकार उन्हें 5 अप्रैल 2021 को गृह मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।

बंगाल हिंसा: 2 मई 2021 को बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम में TMC को प्रचंड जीत मिलने के बाद राज्य में जगह-जगह हिंदू विरोधी, भाजपा विरोधी हिंसा हुई। इस दौरान सैंकड़ों हिंदुओं पर हमले हुए, महिलाओं के सामूहिक बलात्कार हुए, बच्चों से बर्बरता हुई और कई घरों को आग लगा दी गई। बंगाल पुलिस की कार्रवाई की पोल भी तब खुली, जब विभिन्न संगठन जमीन पर उतरे और पीड़ितों की आपबीती को जनता के सामने पेश किया। बंगाल हिंसा पर उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश की एक रिपोर्ट में बताया गया कि बंगाल में हिंसा की 15000 घटनाएँ हुईं, 25 मौत हुईं और 7000 महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया। ख़बरें यह भी आईं कि हज़ारों हिन्दुओं ने बंगाल से भागकर त्रिपुरा या असम में शरण ली।  

राज कुंद्रा पोर्नोग्राफी केस: जुलाई 2021 में बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा सुर्ख़ियों में रहे। इस खबर पर न सिर्फ मेनस्ट्रीम मीडिया में बल्कि सोशल मीडिया पर भी कई दिनों तक जमकर चर्चा चली। 19 जुलाई को राज कुंद्रा को जब पोर्नोग्राफी केस में गिरफ्तार किया, गया तो पूरे बॉलीवुड में हड़कंप मच गया। पुलिस की जाँच और पूछताछ से इतर कई अभिनेत्रियों ने सामने आकर कुंद्रा पर संगीन इल्जाम लगाए। मामला इतना संगीन था कि कुंद्रा को पूरे 2 महीने जेल में रहने के बाद जमानत मिली और वो 21 सितंबर को जाकर अपने घर लौटे।

अफगानिस्तान-तालिबान विवाद: अगस्त 2021 का पूरा महीना अफगानिस्तान और आतंकी संगठन तालिबान के नाम रहा। लंबे समय से चल रहे टकराव के बाद 15 अगस्त को तालिबान ने काबुल पर अपना अधिपत्य जमा लिया था। खबर आई थी कि देश के राष्ट्रपति गनी मुल्क छोड़ पलायन कर गए हैं और देश पर अब तालिबान का राज है। कट्टरपंथियों ने यह बात फैलाई कि यह नया तालिबान है जो पहले से अलग है। हालाँकि, तालिबान के देश में आते ही वहाँ हालात बदलने लगे। लड़कियों को बुर्के में रहने के फरमान जारी हो गए और जगह-जगह खुले में पत्रकारों, कवि, कॉमेडियन पर हमले होने लगे। इस बीच हज़ारों की संख्या में अफगानी लोग भी मुल्क छोड़कर पलायन कर गए, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुए। 

असम हिंसा: 2021 का सितंबर महीना आधा तो तालिबान और अफगानिस्तान की खबरों के साथ गुजरा और आधे महीने में असम के दरांग में हुई हिंसा छाई रही। दरअसल, यह हिंसा 23 सितंबर को हुई, जब दरांग जिले में पुलिस की टीम, अतिक्रमणकारियों से जमीन खाली कराने पहुंची, वहां भीड़ ने जवानों पर हमला बोल दिया और 11 पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। सरकार ने इस हिंसा पर जवाब दिया कि 10,000 मुस्लिमों की भीड़ ने पुलिस की टीम को घेर कर लाठी-डंडों व ईंट-पत्थर से हमला बोल दिया था, तभी पुलिस ने एक्शन लिया। इस घटना की कई वीडियोज भी सोशल मीडिया पर वायरल हुईं थी।

आर्यन खान केस: अक्टूबर में मीडिया में जो सबसे अधिक सुर्ख़ियों में रही, वो अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की गिरफ़्तारी की है। 2 अक्टूबर को आर्यन को मुंबई के क्रूज ड्रग मामले में उनके साथियों के साथ NCB ने गिरफ्तार किया और 3 हफ्ते से अधिक का वक़्त उन्हें जेल में गुजारना पड़ा। इस दौरान जब उन्होंने ड्रग सेवन की बात को कबूल किया,  तो सोशल मीडिया पर शाहरुख खान की खूब किरकिरी हुई। जगह-जगह उनके पुराने इंटरव्यू दिखाए गए और उनकी परवरिश पर सवाल उठाए गए।

दिवाली पटाखा बैन: वर्ष 2021 में नवंबर का महीना वैसे तो त्योहारों के चलते सुर्ख़ियों में था। किन्तु, इस महीने दिवाली थी और हिंदुओं के पावन त्योहार पर एक बार फिर राज्य सरकारें पटाखों पर प्रतिबन्ध लगा रही थीं। ऐसे में सोशल मीडिया पर बस सवाल किए जा रहे थे कि यदि सवाल प्रदूषण का है तो सिर्फ दिवाली पर प्रतिबन्ध क्यों। इन्हें क्रिसमस और न्यू ईयर और साल भर में होने वाली शादियां और अन्य आयोजनों पर भी बैन किया जाना चाहिए। 

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर: 2021 का अंतिम महीना, दिसंबर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लोकार्पण की ख़बरें सुर्ख़ियों में रही।  13 दिसंबर को पीएम नरेंद्र मोदी ने कॉरिडोर का उद्घाटन किया, जिसे देश भर में कवरेज मिली और आज भी इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

स्वर्ण मंदिर में लिंचिंग: हाल में पंजाब के अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में हुई एक शख्स की मॉब लिंचिंग भी चर्चा में है। वहाँ श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने के इल्जाम में व्यक्ति की हत्या करके उसकी लाश को गुरुद्वारा परिसर के बाहर फेंक दिया गया, किन्तु इस मामले में पुलिस या किसी सियासी दल के नेताओं ने निंदा तक नहीं की।

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