लंदन के डॉरक्टर्स की बड़ी सफलता, HIV से संक्रमित व्यक्ति को किया ठीक

नई दिल्‍ली : एचआईवी एड्स का नाम सुनते ही सबसे पहले आपके जहन में इसके लाइलाज बिमारी होने की बात आती है। इसके बाद दिमाग में आता है कि यह एक जानलेवा बीमारी है, जिससे यदि कोई व्यक्ति संक्रमित हो गया तो उसका बचना तक़रीबन नामुमकिन है। इस तरह की बातों का जहन में आना कुछ अलग इसलिए भी नहीं है क्‍योंकि इस बीमारी का उपचार या तो है ही नहीं या फिर इतना महंगा है और पहुंच से बाहर है कि वहां तक आम आदमी की पहुंच ही नहीं है।

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किन्तु अब ऐसी सोच को रखने वालों को दोबारा विचार करने की आवश्यकता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि इस एड्स वायरस का उपचार करने के क्षेत्र में डाक्‍टरों को बड़ी कामयाबी मिली है। जर्नल नेचर में छपी एक रिपोर्ट में चिकित्सकों ने दावा किया है कि लंदन के एक एचआईवी पॉजिटिव मरीज को स्‍टेम सेल ट्रांसप्‍लांट के माध्यम से इस जानलेवा वायरस से मुक्‍त करा लिया गया है। उल्लेखनीय है कि इस तरह की खबर दस साल पहले उस समय भी सामने आई थी जब दुनिया में पहली बार इस जानलेवा वायरस से एक मरीज को मुक्‍त कराया गया था।

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इस तरह के पहले मरीज के नाम को गुप्त रखते हुए इसको बर्लिन पेशेंट का नाम दिया गया था। इसे 2008 में एड्स मुक्‍त करार दिया गया था। बाद में इस व्यक्ति ने खुद अपनी पहचान उजागर करते हुए अपना नाम टिमोथी ब्राउन बताया था। ब्राउन को मेलॉड ल्‍यूकेमिया था। चिकित्सकों ने उस पर बॉनमैरो ट्रांसप्‍लांट किया था जिसके बाद वो एचआईवी एड्स से मुक्‍त हो गया था।

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