आखिर लॉकडाउन में कितनी गिर सकती है विकास दर ?

देशभर में COVID-19 के दौरान लागू लॉकडाउन के बीच क्रिसिल ने वित्त वर्ष 2021 में भारत के लिए ग्रोथ आउटलुक को संशोधित कर पहले के अनुमानित 3.5 फीसद से 1.8 फीसद कम कर दिया है. क्रिसिल ने अपनी रिसर्च रिपोर्ट में बताया है कि कमजोर घरों, कमजोर फर्मों, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) तक राहत पहुंच सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय और राज्य स्तरों पर राजकोषीय समर्थन को बढ़ाया जा सकता है.

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आपकी जानकारी के लिए बता दे कि 3 मई 2020 को लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी ऐसी संभावना है कि अर्थव्यवस्था के कुछ हिस्सों में आगे भी प्रतिबंध जारी रहेगा. इसके अलावा कुछ उन्नत देशों में वैश्विक मंदी की आशंका है.

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अगर आपको नही पता तो बता दे कि S&P ने 2020 में अपने वैश्विक जीडीपी ग्रोथ रेट पूर्वानुमान को -2.4 फीसद तक कम कर दिया है, जबकि इससे पहले की वृद्धि 0.4 फीसद थी. CRIS रिसर्च ने कहा कि भारत के पूर्वानुमान के जोखिम नीचे की ओर जा रहे हैं, जिसके सामने आने से जीडीपी विकास दर भी शून्य हो सकती है. साथ ही, लॉकडाउन ने पहले से ही अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान पहुंचाया है. मसलन मार्च में ऑटोमोबाइल की बिक्री में सालाना आधार पर 44 फीसद की गिरावट आई, जबकि निर्यात में 35 फीसद की गिरावट आई है, अब तक यह सबसे खराब प्रदर्शन है.

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