तीर्थ यात्रा के लिए ले सच्ची सीख

मानव के जीवन में तीर्थ यात्रा का एक बहुत बड़ा महत्व होता है। चाहे वह किसी भी क्षेत्र की तीर्थ यात्रा हो बहुत से लोग दूर-दूर तक तीर्थ यात्रा के लिए जाते है। अनेकों धर्म कर्मों के साथ तीर्थयात्रा का भी मानव के जीवन में अत्यधिक महत्व है धार्मिक ग्रंथों में वेद और पुराणों में भी तीर्थयात्रा से संबंधित उल्लेख मिलते है।

इस शुभ यात्रा को करने के लिये प्रत्येक व्यक्ति को कुछ बिशेष बातों का ध्यान रखना अति आवश्यक है -

1. यदि आप स्वस्थ व हष्ट पुष्ट हे तो किसी व्यक्ति या जीव की सवारी बनकर यात्रा न करें। 

2. मन की एकाग्रता के साथ ईश्वर के दर्शन करें।

3. भगवान को एक हात से प्रणाम नहीं करना चाहिए।

4. किसी भी व्यक्ति की निंदा न करे शांति के साथ ध्यान मग्न होकर दर्शन करना लाभप्रद होगा।

5. मंदिर परिसद मे भोजन न करें आपसी बातचीत को विराम दें।

6. तीर्थ के लिए आये लोगों की सहायता करना चाहिए। 

7. भ्रमण करते समय भगवान के सामने आकर कुछ समय के लिये रुकें फिर परिक्रमा करना शुरू करें।

8. मंदिर परिसद मे आसान के साथ बैठें व श्री भगवान के श्रीविग्रह के सामने पैर पसारकर बैठना।

9. यात्रा के समय किसी भी व्यक्ति से न उलझे व कलह न करें।

10. किसी को निष्ठुर वचन न बोले प्रेम पूर्वक यात्रा करें।

11. अपना अत्यधिक समय ईश्वर के दर्शन व उपासना मे व्यतीत करें क्योंकि ये समय बार बार नहीं मिलता है।

12. श्री भगवान को निवेदित किए बिना किसी भी वस्तु को न खाएं।

13. प्रत्येक ऋतु में आये फलों को खाने से पहले भगवान को भोग लगायें।  

14. शुद्ध व साफ फल या अन्य सामग्री प्रसाद रुप मे अर्पित करें।

15. भगवान के समक्ष पीठ देकर मत बैठें।

16. ईश्वर के समक्ष मंदिर परिसद के अंदर किसी व्यक्ति विशेष के पैर मत छुए।

17. संतो के दर्शन करें व उनके द्वारा दी गई सच्ची सीख को अपने जीवन में उतारें।

18. अपने ही मुख से अपने जीवन व जन की प्रशंसा न करें ।

19. किसी भी देवी व देवता की निंदा करना एक बडा पाप है।

20. मंदिर परिसद मे प्रदूषण न फेलाएं व्यर्थ की बातों से बचे एकाग्रता हासिल करें।

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