इज़राइल- फिलिस्तीन का नासूर बना गाज़ा क्षेत्र

यरूशलेम: गज़ापट्टी का इतिहास तो 1948 में इजराइल के निर्माण के साथ शुरु होता है पर इस क्षेत्र के सम्पूर्ण इतिहास के लिए इसरायल का इतिहास देखा जा सकता है, 1948 में इजराइल के निर्माण के बाद यहाँ बसे अरबों के लिए अर्मिस्टाइस रेखा बनाई गई, जिसके तहत गजा पट्टी में अरब, जो सुन्नी मुस्लिम हैं, रहेंगे तथा यहूदी इजराइल मे रहेंगे. 1948 से लेकर 1967 तक इसपर मिस्र का अधिकार था पर 1967 के छःदिनी लड़ाई में, जिसमें इजराइल ने अरब देशों को निर्णायक रूप से हरा दिया, उस समय इजराइल ने मिस्र से यह पट्टी भी छीन ली जिसके बाद से इसपर इजराइल का नियंत्रण बना हुआ है.

जिसके बाद से इजराइल और फिलिस्तीन के बीच इस क्षेत्र को लेकर तनाव उत्पन्न हो गया और इस आग में घी डालने का काम किया आतंकी संगठन अल हमास ने. अब इजराइल और फलीस्तीन दोनों इस क्षेत्र को लेकर आपस में उलझते रहते हैं, लेकिन इस विवाद का कोई हल नहीं निकलता. अभी हाल ही में इज़राइल द्वारा ग़ज़ा पट्टी पर किए गए हमले में क व्यक्ति की मौत हो गयी जबकि 176 अन्य घायल हो गए. फिलिस्तीनी मंत्रालय ने बताया है कि घायलों में से 10 की हालत नाजुक है जिसमें 16 साल का एक किशोर भी शामिल है. इसके सिर में गोली लगी है. 

वहीं सेना ने बताया कि उपद्रवियों ने गाजा के एक ईंधन परिसर और कुछ और जगहों पर आग लगा दी जिससे 90 लाख अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ है. 30 मार्च से लेकर अभी तक हुए हमलों में लगभग 41 फिलिसनी प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जबकि 1800 से अधिक घायल हो गए हैं. इजराइल और फिलिस्तीन के बीच का यह संघर्ष अभी तक हज़ारों जानें ले चुका है और कई लोग अपने हाथ-पैर गँवा चुके हैं. लेकिन उसके बाद भी दोनों देश इस विवाद को हल करने के लिए कोई विशेष प्रयास करते दिखाई नहीं देते. 

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