अपनी सादगी के लिए आज भी याद किए जाते है लाल बहादुर शास्त्री

नई दिल्ली: 2 अक्टूबर को हर साल गांधी जयंती के साथ लाल बहादुर शास्त्री की जयंती भी सेलिब्रेट की जाती है। पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को यूपी के मुगलसराय जिले में हुआ था। वह 1964 में भारत के पीएम बने और 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बीच देश का नेतृत्व किया।

भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान देश को मिला ‘जय जवान’ ‘जय किसान’ का नारा: वर्ष 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बीच उन्होंने देश में ‘भोजन की कमी’ के बीच सैनिकों और किसानों का मनोबल बढ़ाने के लिए ‘जय जवान’ ‘जय किसान’ का नारा भी दिया था। उस वक़्त उन्होंने अपना वेतन तक लेना बंद किया। उन्होंने अपने विनम्र स्वाभाव, मृदुभाषी व्यवहार और आम लोगों से जुड़ने की क्षमता से इंडिया की राजनीति पर अमिट छाप छोड़ी थी। इंडिया को ब्रिटिश शासन के चंगुल से मुक्त कराने के लिए सैकड़ों महान स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति दे डाली। देश के स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख प्रचारकों में से एक लाल बहादुर शास्त्री हैं, जिन्होंने मुख्य रूप से देश के गरीब वर्ग के लिए लड़ाई लड़ी।

लाल बहादुर शास्त्री ने ताशकंद में ली अंतिम सांस: मुगलसराय में शारदा प्रसाद श्रीवास्तव और रामदुलारी देवी के घर जन्मे लाल बहादुर शास्त्री 1964 से 1966 तक भारत के दूसरे पीएम थे। उन्होंने वर्ष 1961 से 1963 तक देश के छठे गृह मंत्री के रूप में भी काम किया। 11 जनवरी, 1966 को कार्डियक अरेस्ट के बाद लाल बहादुर शास्त्री ने ताशकंद में अंतिम सांस ली। वहां शास्त्री पाक के तत्कालीन राष्ट्रपति एम अयूब खान के साथ युद्धविराम का एलान पर हस्ताक्षर करने और युद्ध को खत्म करने पहुंचे थे।

स्वतंत्रता सेनानी ने 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी के साथ अपना जन्मदिन ही नही शेयर किया बल्कि गांधीवाद के प्रबल सर्मथक भी थे। लाल बहादुर शास्त्री को श्वेत क्रांति जैसे ऐतिहासिक अभियान शुरू करने के लिए भी पचाना जाता है, जिसने देश में दूध के उत्पादन बढ़ाया।

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