कांग्रेस के इस गढ़ को भेद पाना बीजेपी के लिए साबित होगी टेढ़ी खीर

Oct 13 2018 05:20 PM
कांग्रेस के इस गढ़ को भेद पाना बीजेपी के लिए साबित होगी टेढ़ी खीर

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 में फिर से प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने के लिए बीजेपी पूरी जोर—शोर से लगी हुई है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह लगातार प्रदेश के कार्यकर्ताओं में जोश भर रहे हैं। अमित शाह ने जीत के लिए कार्यकर्ताओं को 200 पार का नारा भी दिया है। अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के सपने को पूरा करने के लिए बीजेपी कांग्रेस के अभेद किलों को भेदने की फिराक में है, लेकिन कुछ सीटें ऐसी हैं, जहां पर कांग्रेस को हरा पाना बीजेपी के लिए टेढ़ी खीर साबित हो सकती है। इन्हीें में से एक सीट है भिंड जिले की लहार विधानसभा सीट। 

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इस सीट से कांग्रेस के नेता गोविंद सिंह चुनाव लड़ते हैं। गोविंद सिंह का दबदबा कुछ ऐसा कायम  है कि लहार से वह  लगातार 6 बार विधायक बने हैं। बीजेपी ने सिंह को हराने के लिए बार—बार नए प्रत्याशी को  मौका दिया, लेकिन कांग्रेस  को यहां से हरा पाना संभव न हो सका। लहार में पहली बार 1962 मे विधानसभा चुनाव हुआ था। 

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32 साल से काबिज है कांग्रेस 

इस सीट पर कांग्रेस लगातार 32 साल से अपना कब्जा जमा रही है। 1985 में यहां से भाजपा के  मथुरादास महंत ने जीत दर्ज की थी। उसके बाद भाजपा कभी यहां सत्ता में नहीं आ पाई। इस सीट से वर्तमान में गोविंद सिंह विधायक हैं।  गोविंद सिंह पहली बार लहार से 1990 में खड़े हुए थे और उन्होंने यह चुनाव जीता था। तब से लेकर अब तक वही यहां के विधायक हैं। इतना ही नहीं 2003 और 2008 में  तो यहां से बीजेपी प्रत्याशी की जमानत तक जब्त हो गई थी। 

क्या कहते हैं समीकरण

लहार में भदौरिया, ओबीसी और ब्राह्मणों का वर्चस्व है। बीजेपी ने एससी—एसटी एक्ट में जो संशोधन किया है और उसके बाद जिस तरह से सवर्ण सरकार से नाराज हैं, उसे देखते हुए तो यही लगता है कि इस बार भी यहां से कांग्रेस ही जीतेगी। 

पिछले चुनाव में क्या थी स्थिति 

2013 में इस सीट से गोविंद सिंह को बीजेपी के रसाल सिंह ने कड़ी टक्कर दी थी, लेकिन गोविंद सिंह ने 6273 वोटों से बीजेपी प्रत्याशी को हरा दिया था। 2008 में गोविंद सिंह ने इस सीट से बसपा प्रत्याशी को 4878 वोटों से शिकस्त दी थी। 2008 में इस सीट से बीजेपी प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई थी। 

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