'भूखे मर जाऊंगा लेकिन दूसरे राज्य नहीं जाऊंगा....' गृहराज्य लौटे मजदूरों का छलका दर्द

रांची: झारखंड के लातेहार जिले के सासंग गांव के निवासी अजीज अंसारी कई सपने संजोए कुछ महीने पहले तेलंगाना गए थे. तेलंगाना पहुंचने के बाद इनके सपनों को पंख भी लग गए थे, किन्तु  कोरोना महामारी के बाद अब ये वापस अपने गांव, घर को छोड़ना नहीं चाहते. तेलंगाना में रहते हुए इनकी उम्मीदें उस समय बिखर गईं, जब कोरोना संक्रमण के इस दौर में उन्हें दो वक़्त की रोटी के लिए परेशान होना पड़ा. 

अजीज शनिवार को अपने लातेहार डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर पहुंच गए हैं और कुछ ही देर में अपने गांव भी पहुंच जाएंगे. अजीज ने कहा कि अब वे बुरे दिन को याद नहीं करना चाहते हैं. अब चाहे जो हो जाए, चाहे वो भूखे मर जाएं लेकिन वह राज्य से बाहर नहीं जाना चाहते. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी इंसान अपने गांव, घर, परिजनों को छोड़कर नहीं जाना चाहता. यहां सरकार यदि रोजगार के साधन मुहैया करा दे, तो कोई क्यों जाए?

यह कहानी सिर्फ अजीज की नहीं है, तेलंगाना से एक स्पेशल ट्रेन से सवार होकर रांची आए ज्यादातर लोगों की है. तेलंगाना से रांची के हटिया स्टेशन से हाथ में गुलाब फूल और खाने का पेकेट लिए स्टेशन परिसर से निकलते श्रमिकों के वापस अपने राज्य लौटने पर खुशी का ठिकाना नहीं था. वह अपने राज्य आकर प्रसन्न है. वह वापस आने और मिली सुविधा से खुश है. उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि वहां भी भोजन ठीक ही मिल रहा था, मगर परिजनों की याद बहुत आती थी.

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