'कुकी उग्रवादियों को दण्डित करने की जरूरत..', बौद्ध भिक्षु अशीन विराथु का बड़ा बयान

'कुकी उग्रवादियों को दण्डित करने की जरूरत..', बौद्ध भिक्षु अशीन विराथु का बड़ा बयान
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उखरुल: म्यांमार के राष्ट्रवादी बौद्ध भिक्षु अशीन विराथु ने गुरुवार को कुकी उग्रवादियों को दण्डित करने की मांग की है। उन्होंने एक्स पर लिखा है कि, "सभी कुकी पुरुषों और महिलाओं को जेल भेजा जाना चाहिए, और बच्चों को किशोर गृह में भेजा जाना चाहिए। ऐसा मत सोचो कि सभी बुरे नहीं हैं। वे सभी हत्या और आतंकवाद जैसी गतिविधियों में शामिल हैं। वे अपराधी हैं। उन्हें सुधारने और कानून के दायरे में लाने के लिए उन्हें दंडित करना आवश्यक है।"

 

इस ट्वीट के बाद म्यांमार में चिन-कुकी समूह पर हमला हुआ है, जिसमें कहा गया कि, "मैं कुकी संगठित आपराधिक समाज का खुलकर विरोध करता हूं। चिन-कुकी ने धोखे से यहाँ शरण ली और बाद में उन्होंने नशीली दवाओं का व्यापार शुरू कर दिया और अन्य लोगों का नरसंहार किया। उन्हें दंडित किया जाना चाहिए। कुकी बच्चों को किशोर गृह में रखा जाना चाहिए, ताकि वे अच्छे इंसान बन सकें।" मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 4 जनवरी, 2023 को म्यांमार के स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान, सैन्य जुंटा ने राष्ट्रवादी बौद्ध भिक्षु अशिन विराथु को "थिरी प्यांची" की उपाधि से सम्मानित किया, जिससे विवाद पैदा हो गया। 969 संगठन के नेता विराथु को अपनी राष्ट्रवादी सोच के चलते सजा भी मिली है, वो म्यांमार के स्थानीय निवासियों के लिए आवाज़ उठाते हैं और रोहिंग्या तथा कुकी उग्रवादियों का विरोध करते हैं, जिसके कारण उन्हें दंगों की साजिश रचने के लिए 25 साल की जेल की सजा भी सुनाया गई थी।

हालाँकि, इसके बावजूद वे वह सैन्य समर्थक रैलियों में दिखाई दिए, उन्होंने राष्ट्रवादी भाषण दिए और घुसपैठियों के खिलाफ कदम न उठाने के लिए तत्कालीन नेता आंग सान सू की और उनकी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी सरकार की आलोचना की। ऑस्ट्रेलियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स की एक रिपोर्ट, जिसका शीर्षक है "म्यांमार में भिक्षुओं और सेना के बीच अपवित्र संबंध," में कहा गया है कि सत्ता बनाए रखने के लिए सेना द्वारा धर्म का उपयोग करने की गहरी ऐतिहासिक जड़ें हैं। आंग सान सू की की सरकार के तहत, राष्ट्रवादी भिक्षुओं को दबा दिया गया था, लेकिन 2021 के तख्तापलट में उनका पुनरुत्थान हुआ और उन्होंने जुंटा को समर्थन दिया। अल्पसंख्यकों के खिलाफ महत्वपूर्ण हिंसा के लिए जिम्मेदार ये भिक्षु अब सेना के अति-राष्ट्रवादी और इस्लामोफोबिक एजेंडे को बढ़ावा दे रहे हैं। म्यांमार का राष्ट्रवादी आंदोलन बौद्ध कट्टरवाद से जुड़ा हुआ है।

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