आखिर क्यों सिख नहीं खाते तम्बाकू, जानिए दिलचस्प जानकारी

आप सभी ने आज तक कई लोगों को तम्बाकू खाते देखा होगा लेकिन क्या कभी किसी सिख को देखा है, शायद नहीं। वैसे आज हम आपको बताने जा रहे हैं इसके पीछे की वजह। जी दरअसल इसके पीछे सिखों के 10वें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी रहे। आप सभी को बता दें कि खालसा पंथ की स्थापना करने वाले और सिखों के 10वें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ही रहे है।

पटना में गुरु गोबिंद सिंह का जन्म 22 दिसंबर सन् 1666 को हुआ था। जी हाँ और इस दिन गुरुद्वारे में शब्द कीर्तन और लंगर का आयोजन किया जाता है। हालाँकि गुरु गोबिंद सिंह सिखों के इतिहास के सबसे महान योद्धा हैं और उनके विचार और भी बेहतरीन रहे। जी दरअसल जब उन्होंने साल 1699 में जब खालसा पंथ की स्थापना की थी, तब उन्होंने जीवन जीने के लिए पांच सिद्धांत दिए थे, जिन्हें पंच ककार के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा सिखों को बुरी चीज से बचने और अनुशासित बनाकर रखने के लिए कुछ नियम बनाए थे और इन चीजों को चार कुरहिते नाम दिया था। जी दरअसल चार कुरहिेते में एक तंबाकू भी शामिल है। जी हाँ, गोबिंद सिंह जी ने बताया है कि इंसान को कभी भी तंबाकू का सेवन नहीं करना चाहिए और इसी वजह से सिख कभी तंबाकू का सेवन नहीं करते हैं। आपको बता दें कि तंबाकू के बुरे परिणाम को जानते हुए ही गोबिंद सिंह जी ने इसका सेवन करने से मना किया था। इसके पीछे एक कथा है जो आज हम आपको बताने जा रहे हैं।

रोचक कथा- एक बार गुरु गोबिंद सिंह जी अपने शिष्यों के साथ कहीं जा रहे थे। तभी रास्ते में उनको तंबाकू का पौधा दिख गया, जिससे उन्होंने अचानक अपने घोड़े रोक लिए। घोड़े से उतरकर गोबिंद सिंह जी ने तंबाकू का पौधा उखाड़कर फेंक दिया। गुरु को ऐसा करते देख शिष्यों के अंदर इस चीज को जानने की जिज्ञासा हुई। असमंजस में पड़े एक शिष्य ने गुरु जी से पूछ लिया कि आखिर आपने ऐसा क्यों किया। तब गुरु गोबिंद सिंह जी ने बताया कि शराब पीने वाले केवल एक पीढ़ी को बर्बाद करते हैं लेकिन तंबाकू खाने वाले सभी पीढ़ियों को बर्बाद कर देते हैं। तंबाकू की बुरी लत से कई भयानक बीमारियां होती हैं, जो मनुष्य को जीवन भर का कष्ट देकर चली जाती हैं। गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपनी दूरदर्शी से सिखों को तंबाकू से होने वाली बीमारियों से बचाने का प्रयास किया। गुरु का ज्ञान शिष्यों के समझ में आ गया इसलिए सिख समुदाय तंबाकू का सेवन नहीं करते।

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