जानिए किस वजह से मनाया जाता है राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस

पीसी महालनोबिस का सबसे बड़ा योगदान 'महालनोबिस दूरी' को कहा जाता है। इस फ़ॉर्मूले की सहायता से एक बिंदु और वितरण के मध्य की दूरी को मापा जा रहा है। इस फ़ॉर्मूले का इस्तेमाल व्यापक रूप से क्लस्टर विश्लेषण और वर्गीकरण के इलाके में किया जा रहा है। पीसी महालनोबिस का योगदान: व्यापक सामाजिक-आर्थिक आँकड़े उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पीसी महालनोबिस ने 1950 में नेशनल सैम्पल सर्वे की स्थापना कर चुके थे। उन्होंने देश में सांख्यिकीय गतिविधियों के समन्वय के लिए केंद्रीय सांख्यिकी संगठन की भी स्थापना कर चुके है। बड़े पैमाने पर नमूनों के सर्वेक्षण करने के लिए तकनीकों की शुरुआत उनके मुख्य कामों में शामिल है। उन्हें रैंडम सैम्पलिंग के तरीक़े का उपयोग कर फसल की पैदावार के आकलन करने का श्रेय भीं दिया जा रहा है।

पीसी महालनोबिस ने एक सांख्यिकीय पद्धति भी तैयार की थी, इसका इस्तेमाल उपयोग विभिन्न समूहों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति की तुलना करने के लिए भी किया जा रहा है। पीसी महालनोबिस बाढ़ नियंत्रण की योजना बनाने के लिए सांख्यिकी लागू करने में भी अग्रणी हो चुके थे ।

महालनोबिस आज़ाद इंडिया के पहले योजना आयोग के महत्वपूर्ण सदस्य रहे और उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित भी किया जा चुका है। इस वर्ष के राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस का थीम भूखमरी का अंत, खाद्य सुरक्षा और पोषण को बेहतर बनाना और सस्टेनेबल खेती को भी आगे बढ़ाना है। ताकि वर्ष 2030 तक भूखमरी का अंत हो और सभी के लिए भोजन की सुरक्षा सुनिश्चित किया जा सके। राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस पर सरकार की ओर से जारी नोट में कहा गया है- '' इस वर्ष महामारी की वजह से सांख्यिकी दिवस को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सेलिब्रेट किया जाने वाला है।''

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