जानिए कौन है माँ काली के आपत्तिजनक पोस्टर से विवादों में घिरी लीना मण‍िमेकलई...?

जैसा की हम सभी जानते है कि डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'काली' के पोस्टर को लेकर इन दिनों लोगों के बीच विवाद और भी ज्यादा बढ़ता ही जा रहा है, बता दें कि  फिल्ममेकर लीना मण‍िमेकलई मां काली को स‍िगरेट पीते और एक हाथ में LGBTQ का झंडा पकडे हुए दिखाया है। इस पोस्टर के रिलीज होने के बाद से हो सकल मीडिया  पर निर्देशक को लगातार ट्रोल किया जाने लगा है, यूजर्स का गुस्सा और भी तेजी से बढ़ता जा रहा है, और अब तो यह मामला इस कदर बढ़ चुका है कि देखते ही देखते केस कनाडा में भारतीय उच्चायोग ने इस मामले पर बयान जारी कर दिया है। 

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि जब लीना मण‍िमेकलई विवादों में आई हो, वह पहले भी अपनी कई डॉक्यूमेंट्री मूवीज की वजह से पहले भी कंट्रोवर्सी का शिकार हो चुकी है। लेकिन बात यही खत्म नहीं होती है लीना जितना अपनी डॉक्यूमेंट्री के लिए विवादों में आई है उससे अधिक उनका निजी जीवन विवादों और संघर्ष से भरा हुआ है।  बात दरअसल यह है कि समाज और परिवार से एवं आर्थिक रूप से वह बहुत ही ज्यादा मुश्किलों में रही है। तो चलिए जानते है लीना के जीवन से जुड़े संघर्षपूर्ण किस्सों के बारें में...

मामा के साथ होने वाली थी लीना की शादी- लीना की शादी की बात करने से पहले हम बात कर लेते है लीना के शुरूआती जीवन के बारें में। बता दें कि लीना मण‍िमेकलई मदुरै के दक्ष‍िण में स्थ‍ित सुदूर गांव महाराजापुरम की निवासी है। बता दें कि उनके पिता उनके पिता कॉलेज लेक्चरर थे। इतना ही नहीं लीना एक किसान परिवार से है। इस बारें में आपको जानकर हैरानी होगी कि लीना के गांव की एक ऐसी प्रथा है जहां प्यूबर्टी के कुछ साल बाद उनका विवाह उनके ही मामा के साथ करवा दिया जाता था। लेकिन जब इस बारें में लीना को पता चला कि उनके घरवाले भी उनका विवाह उनके मामा के साथ करवाने वाले है, और विवाह की सम्पूर्ण तैयारियां शुरू भी की जा चुकी है तब लीना ने घर से भने का फैसला कर लिया। उनका मानना है कि यदि वह ऐसा नहीं करती तो उनके हर वाले उनका विवाह करवा देते और इसी डर से वह चेन्नई भागकर चली गई। घर से भागने के बाद उन्होंने  तम‍िल मैगजीन विकटन के ऑफ‍िस नौकरी के लिए अर्जी दे दी। लेकिन यहाँ भी उन्हें बात बनती हुई कुछ खास नजर नहीं आ रही थी दरअसल उन्हें ऑफ‍िस वालों ने कुछ समय के लिए प्रतीक्षा करने के लिए बोला गया था, और जिसका डर था लीना के साथ वही हुआ, कंपनी वालों ने लीना के घर वालों से संपर्क कर दिया और लीना को उनके परिजनों के हाथों सौंप दिया, पर लीना ने इसके बाद भी हार नहीं मानी उन्होंने अपने परिवारवालों को समझाया और इंजीन‍ियर‍िंग की पढ़ाई करने की बात बताई। 

तमिल डायरेक्टर से प्यार और फिर मां की भूख हड़ताल-  लीना के कॉलेज के लास्ट ईयर में पिता का देहांत हो गया, पिता का सर से साया उठने के बाद लीना ने अपने प‍िता की डॉक्टरल थीसीस जो क‍ि तमिल डायरेक्टर P Bharathiraja पर लिखी हुई थी, जसकी वजह से वह  P Bharathiraja के पास गई और उनके पास जाते ही उनको पहली नजर वाला प्यार हो गया। और आप सभी तो इस बारें में अच्छी तरह से जानते ही है कि ऐसी खबर और बातें छुपाएं नहीं छुपती है, यही लीना के साथ भी हुआ उनके और डायरेक्टर के रिश्ते की ख़बरें और भी तेजी से फैलने लग गई। जब ये बातें लीना की माँ तक पहुंची तो उन्होंने खाना पीना सब कुछ त्याग दिया और अपनी बेटी को घर वापस आने के लिए बोला, जब लीना को माँ की तबियत के बारें में पता चला तब उन्होंने सिनेमा और डायरेक्टर P Bharathiraja को त्याग कर घर के लिए घर चली गई। 

आईटी सेक्टर से लेकर फ्रीलांसर बनने तक-  कुछ वर्षों तक  बेंगलुरू में आईटी सेक्टर में नौकरी हासिल कर ली, लेकिन यहाँ भी लीना की किस्मत कहा बदलने वाली थी, यहीं लीन की मुलाकात टेलीफिल्म मेकर C Jerrold से हो गई और इस जॉब के लिए उन्होंने अपनी पिछली जॉब को छोड़ दिया, लेकिन कुछ ऐसा हुआ कि लीना C Jerrold के साथ भी ज्यादा समय तक काम नहीं कर पाई, और एक एक करके उन्होंने लगातार कई नौकरी बदली। लेकिन कहते है कि एक बार कुछ करने का ठान लो तो वह पूरा हो ही जाता है, लीना ने भी ऐसा ही किया उन्होंने  फ्रीलांसर बनने का निर्णय कर लिया। लेकिन यहाँ भी लीना के मन में कई तरह की उथलपुथल चलती रही, तब जा कर लीना को एहसास हुआ कि असल में वह क्या करना चाहती है। बता दें कि लीना शोषण का शिकार हुए लोगों, और सामाजिक मुद्दों के लिए लोगों की आवाज बनाना चाहती थी, वह राजनितिक हस्तक्षेप करना चाहती थीं, उन्हें पता था कि यदि वह ऐसा करती है तब ही परिवर्तन देखने के लिए मिल सकता है। और कुछ समय के बाद वर्ष 2002 में लीना ने अपनी पहली मूवी 'Mathamma' पर काम करना शुरू कर दिया।

घर का किराया देने के नहीं थे पैसे- जब लीना ने अपनी पहली मूवी में काम करना शुरू किया तब उन्होंने ठान लिया था कि वह अब कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखेंगी, और उन्होंने इस फैसले पर काम करना शुरू कर दिया, इसके बाद उन्होंने अपने काम फ्रीलांस‍िंग से पैसे कमाए और उन्हें अपनी फिल्मों पर लगाना शुरू कर दिया, जिसके साथ उन्होंने कई फेलोश‍िप्स जीते, कई इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म्स पर उनकी मूवीज का प्रीमियर भी किया गया, लेकिन लीना को यह अंदाजा नहीं था की वह अपने प्रोजेक्ट में पैसे तो लगा रही है पर उनके पास खुद के लिए एक भी पैसा नहीं है, यही नहीं एक वक़्त तो ऐसा आया जब लीना के पास घर तक का किराया देने के लिए पैसे नहीं थे।

इन फिल्मों पर हुआ था विवाद- धीरे धीरे वक़्त बीतता हुआ चला गया है, और वर्ष 2002 में लेना ने देवदासी प्रथा को लेकर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म पर काम करना शुरू कर दिया। और इस मूवी का नाम  'Mathamma' तय किया गया। इस फिल्म में उन्होंने नाबाल‍िग लड़क‍ियों को 10-20 रुपये में मंद‍िर में दान किए जाने एवं पुजारी-पंड‍ितों द्वारा उनके शोषण की कहानी के बारें में एक एक पहलू को बड़ी ही गहराई दे लोगों के बीच पेश  किया। अरुंधत‍ियार समुदाय समेत खुद अपने पर‍िवार से रोष को झेलने के बाद उन्होंने वर्ष 2004 में दलित महिलाओं के विरुद्ध होने वाली हिंसा  पर डॉक्यूमेंट्री बनाने का फैसला कर लिया और इसके बाद उन्होंने इस मूवी के ऊपर काम करना शुरू कर दिया और इस मूवी को उन्होंने  'Parai' नाम दिया। लेकिन लीना को यह नहीं मालूम था कि इस मूवी को बनाने के बाद उन्हें लोगों का काफी आक्रोश झेलना पड़ गया। लेकिन इसके बाद भी उन्होंने हार न मामने का फैसला किया और अपने हक़ की लड़ाई लड़ती ही रही। वर्ष 2011 लीना ने विवाद को एक बार फिर से दावत दे डाली। और इस बार विवाद में होने की वजह सामने आई उनकी एक और नई डॉक्यूमेंट्री, जिसका नाम 'Sengadal' था। इस मूवी के लिए सेंसर बोर्ड कई माह तक की लड़ाई करने के बाद आखिरकार लीना को जीत हासिल हो ही गई, और इसे कई इंटरनेशनल फिल्म फेस्ट‍िवल्स में सराहा गया। इतने विवादों को झेलने के बाद भी वह नहीं रुकी और एक बार फिर से वह फिल्म काली के पोस्टर को लेकर विवादों में आ चुकी है, अब इस बात का स्पष्टीकरण तो अभी नहीं दिया जा सकता है कि ये विवाद कब तक चलने वाला है। 

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