करने जा रहे अगर भोजन तो पहले ये खबर पढ़ लें

बदलते समय के साथ-साथ व्यक्ति का रहन-सहन भी बदल गया है, आज व्यक्ति के पास इतना भी समय नहीं है कि वह चैन से बैठकर भोजन कर सके, इसी समय की कमी के कारण व्यक्ति खड़े होकर भी भोजन कर लेता है. लेकिन प्राचीन समय में व्यक्ति भूमि पर बैठकर बड़े प्रेम से भोजन करता था, इसके पीछे कुछ पौराणिक कारण और धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है. आइये जानते है वह क्या है?

आसन लगाकर भोजन करना 
हिन्दू धर्म की मान्यता है कि व्यक्ति जिस तरीके से भोजन ग्रहण करता है, उसे उसी प्रकार उसका फल मिलता है. इसीलिए प्राचीन काल में ऋषि मुनियों द्वारा आसन लगाकर भोजन किया जाता था. जो की भोजन करने का सही और उत्तम तरीका माना जाता है.

भूमि पर बैठकर भोजन करना 
प्राचीन मान्यता के अनुसार व्यक्ति यदि भूमि पर बैठकर भोजन करता है, तो उसका स्वास्थ ठीक रहता है, तथा उसकी पाचन क्रिया भी सही रहती है. और उसे पेट सम्बन्धी सभी रोगों से छुटकारा मिलता है. केवल इतना ही नहीं पहले के समय में भोजन करने के लिए दिशा का भी ध्यान रखा जाता था और भोजन पूर्व दिशा की ओर मुख करके किया जाता था ऐसा माना जाता था की पूर्व दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से व्यक्ति की यश व आयु में वृद्धि होती है.

लम्बी उम्र के लिए 
प्राचीन समय की ये मान्यता है की भूमि पर पालथी मारकर भोजन करने से व्यक्ति की उम्र लम्बी होती है इसी कारण से प्राचीन समय के व्यक्ति सौ वर्ष की आयु तक जीवित रहते थे.

 

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