महाशिवरात्रि : जानिए कब और क्यों नहीं तोडना चाहिए बिल्वपत्र

Feb 26 2019 10:00 PM
महाशिवरात्रि : जानिए कब और क्यों नहीं तोडना चाहिए बिल्वपत्र

भगवान शिव को अगर कोई चीज़ सबसे ज्यादा पसंद है तो वह है बिल्व पत्र. जी हाँ, कहते हैं बिल्व पत्र भोलेनाथ जी को अर्पित करने से बहुत से लाभ होते हैं. ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि बिल्व पत्र को कब-कब नहीं तोडना चाहिए क्योंकि अगर आप उस दिन बिल्व पत्र तोड़ते हैं तो आपको घोर पाप लग सकता है. आइए जानते हैं.

बिल्वपत्र कब न तोड़ें - कहा जाता है और ज्योतिषों के अनुसार बिल्वपत्र को तोड़ने के लिए चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या, संक्रांति काल एवं सोमवार को निषिद्ध माना गया है. वहीं लिंगपुराण के अनुसार शिव या देवताओं को बिल्वपत्र प्रिय होने के कारण इसे समर्पित करने के लिए किसी भी दिन या काल जानने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह हमेशा उपयोग हेतु ग्राह्य है. कहते हैं जिस दिन तोड़ना निषिद्ध है उस दिन चढ़ाने के लिए साधक को एक दिन पूर्व ही तोड़ लेना चाहिए. ज्योतिष मानते हैं कि बिल्वपत्र कभी बासी नहीं होते और यह कभी अशुद्ध भी नहीं हो सकते हैं. अगर आप इन्हें एक बार प्रयोग करने के पश्चात दूसरी बार धोकर प्रयोग में लाना चाहिए हैं तो ला सकते हैं.

स्कन्द पुराण के इस श्लोक में आज्ञा है- '‍अर्पितान्यपि बिल्वानि प्रक्षाल्यापि पुन: पुन:. शंकरार्यर्पणियानि न नवानि यदि क्वाचित..'

इसका मतलब है कि बिल्वपत्र के वे ही पत्र पूजार्थ उपयोगी हैं जिनके तीन पत्र या उससे अधिक पत्र एकसाथ संलग्न हों. त्रिसंख्या से न्यून पत्ती वाला बिल्वपत्र पूजन योग्य नहीं होता है. प्रभु को अर्पित करने के पूर्व बिल्वपत्र की डंडी की गांठ तोड़ देना चाहिए. सारदीपिका के 'स्युबिल्व पत्रमधो मुखम्' के अनुसार बिल्वपत्र को नीचे की ओर मुख करने (पत्र का चिकना भाग नीचे रहे) ही चढ़ाना चाहिए. पत्र की संख्या में विषम संख्या का ही विधान शास्त्रसम्मत है.

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