जानिए श्राद्ध से जुड़े ये 10 जरूरी नियम

कल से पितृ पक्ष का आरम्भ हो चूका है, वही धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, पितृ पक्ष में पूर्वजों की आत्मा शांति के लिए तर्पण करना चाहिए। परम्परा है कि पितृ पक्ष में हमारे पितर यमलोक से धरती पर आते हैं तथा तर्पण ग्रहण करने के पश्चात् अपने परिवार के लोगों को आशीर्वाद देते हैं। पंचांग के मुताबिक, भादों मास की पूर्णिमा से 20 सितंबर 2021 से पितृपक्ष आरम्भ हो गया। किन्तु पूर्णिमा वाला दिन ऋषियों को समर्पित होता है। उसके अगले दिन मतलब 21 सितंबर से इंसान अपने पूर्वज की मृत्यु तिथि के मुताबिक, तर्पण तथा पिंडदान करा सकते हैं। श्राद्ध करने से पितर खुश होते हैं और हमें सुख-संपत्ति आदि का आशीर्वाद देते हैं। वही जिस श्राद्ध को करने से मनुष्य को आयु, बल, यश, विद्या तथा मृत्यु के उपरांत मोक्ष की प्राप्ति होती है, उस श्राद्ध को करने के लिए कुछ नियम भी बनाए गये हैं। 

श्राद्ध से संबंधित कुछ आवश्यक नियम:-

* शास्त्रों के मुताबिक, श्राद्ध हमेशा अपनी ही जमीन अथवा फिर अपने घर में किया जाना चाहिये।
* श्राद्ध को किसी तीर्थ अथवा नदी या किसी समुद्र तट पर भी किया जा सकता है।
* श्राद्ध के लिये हमेशा दक्षिण की तरफ ढलान वाली जमीन तलाशनी चाहिये क्योंकि दक्षिणायन में पितरों का प्रभुत्व होता है।
* जिस जमीन पर श्राद्ध किया जाए उसे अच्छी प्रकार से साफ करके गोबर, गंगा जल आदि से पवित्र करना चाहिए।
* श्राद्ध का अधिकार सिर्फ पुत्र को दिया गया है, अगर न हो तो पुत्री का पुत्र मतलब नाती भी श्राद्ध कर सकता है।
* अगर किसी मनुष्य के कई बेटे हों तो उनमें से ज्येष्ठ बेटे को ही श्राद्ध करने का अधिकार है।
* अगर किसी का बेटे न जीवित हो तो उसके अभाव में पौत्र तथा पौत्र के न होने पर प्रपौत्र श्राद्ध कर सकता है। बेटे व पोते की गैर हाजिरी में विधवा स्त्री श्राद्ध कर सकती है लेकिन पत्नी का श्राद्ध पति तभी कर सकता है जब उसे कोई बेटा न हो।
* अगर किसी का बेटा है तो उसे अपनी पत्नी का श्राद्ध नहीं करना चाहिये। ऐसी स्थिति में बेटे को ही अपनी माता का श्राद्ध करना चाहिये।
* जिसका कोई बेटा या नाती आदि न हो तो उसके भाई की सन्तान उसका श्राद्ध कर सकती है।
* शास्त्रों के मुताबिक, गोद लिया उत्तराधिकारी भी श्राद्ध करने के लिये योग्य है।

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