खिलता सा कमल लगता है

ेरा हंसना भी खिलता सा कमल लगता है! 
सर्द से आलम में जैसे कि पवन चलता है!
रेंगती है जिन्द़गी मदहोश से ख्यालों में, 
दर्द के दामन में चाहत का चमन खिलता है!

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