परेशान हो कर इस महिला ने काट दिए थे अपने स्तन, ये है भयानक वजह

इस दुनिया में कई तरह की अजीब अजीब परम्पराएं निभाई जाती है. महिलाओं को लेकर तो बहुत सी परम्पराएं आपने सुनी होंगी और आज तक चली  भी आ रही है. भारत के कहीं ना कहीं कोने में महिलाओं को लेकर ये रीती चलती ही रहती है. ऐसी ही एक परंपरा के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपको भी हैरान कर देगी. असल में एक महिला ने केरल में सैकड़ों वर्ष पहले लगाए जाने वाले स्तन कर के खिलाफ आवाज उठाते हुए अपनी जान ही कुर्बान कर दी थी. इस महिला को नांगेली के नाम से जाना जाता था. इसी के बारे में हम आपको कुछ बताने जा रहे हैं. 

दरअसल, एक समय पर केरल में सार्वजनिक तौर पर अपने स्तनों को ढक कर रखने की इच्छा रखने वाली महिलाओं से कर लिया जाता है. यहां पर महिलाएं अपने स्तन को ढंक नहीं सकती थी. तब लोगों ने ऐसे कानून बनाए थे जो बर्बर और अमानवीय थे लेकिन उनका विरोध करने वाला कोई नहीं था. ऐसे में नांगेली ने अपना बलिदान देकर महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए आगे आई. इसके लिए उस महिला ने ऐसा खतरनाक उपाय अपनाया जिसे आप भी सुन नहीं पाएंगे.

आपको बता दें, नांगेली का स्थानीय भाषा में मतलब होता है, 'खूबसूरत.' नांगेली समाज के 'निचले' तबके में मानी जाती थी.  जब स्थानीय कर अधिकारी बकाया ब्रेस्ट टैक्स वसूलने के लिए बार-बार नांगेली के घर आ रहा था तो उसने उन्हें शांति से इंतजार करने के लिए कहा. नांगेली ने फिर केले का पत्ता सामने फर्श पर रखा, प्रार्थना की, दीप जलाया और फिर अपने दोनों स्तन काट डाले. ये देखकर वो भी हैरान रह गए थे.

इसके बाद चेरथला में नांगेली ने जिस जगह पर यह बलिदान दिया था, उसे मुलाचिपा राम्बु कहते हैं. मलयालम में इसका मतलब 'महिला के स्तन की भूमि' होता है. यहां के ज्यादातर लोग इसे 'मनोरमा कवला' कहते हैं. कवला का मतलब होता है जंक्शन. नांगेली के बलिदान के बाद ब्रेस्ट टैक्स का बर्बर कानून हटा लिया गया.

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