मॉडर्न जमाने का करवाचौथ

अरे अरे आप कहाँ पढ रहे है ये आर्टिकल आपके लिए नही है, महिलाओ के लिए है जनाब !! आप तो ये सोचते होंगे की, बीवियां एक तो चैन से जीने भी नही देती ऊपर से करवाचौथ का व्रत रखकर मरने भी नही देती। क्यों सही कह रहे है ना हम !

वैसे तो करवाचौथ का त्यौहार महीलाओ का है और यह उनके लिए बहुत ही खास पर्व होता है, लेकिन अब तो मॉर्डन जमाना है पत्नी के साथ साथ पति भी करवाचौथ का व्रत रखते है, और बस पति पत्नी ही नही कुंवारी कन्याए भी करवाचौथ का व्रत रखती है।  पति पत्नी करवाचौथ रखते है ये बात तो समझ मे आती है लेकिन आखिर कुंवारी कन्याए ये व्रत क्यो रखती है? उनके व्रत का पुण्य कहाँ जाता है? ये बात सर के ऊपर से जाती है।  क्या आप जानते है की  कुंवारी कन्याओ के व्रत का पुण्य कहाँ जाता है ? 

शायद आपका मानना होगा की ये व्रत  कुंवारी कन्याए अपने प्रेमी या अपने होने वाले पति के लिए रखती होंगी। अगर आप लोगो का मानना यह है तो आपका मानना बिल्कुल गलत है जनाब, क्योंकि ऐसा कुछ नही है।  दरअसल, कुंवारी कन्याए ये व्रत अपने भाई एंव पिता के लिए करती है। ताकि उनके भाई और पिता की उम्र लंबी हो।

करवाचौथ का यह व्रत बहुत ही शुभ माना जाता है क्योंकि इसे करने से पति और पत्नी का रिश्ता मजबूत होता है साथ ही घर  में सुख शांति बनी रहती है। इस व्रत को पत्नी निर्जला होकर रखती है ताकि उसके पति की उम्र लंबी हो। 

 इस दिन “संकष्टि चतुर्थी” भी होती है जिसमे भगवान गणेश जी की पूजा करनी चाहिए। ये दोनों एक ही दिन और समय में होते है। करवाचौथ को “करक चतुर्थी” के नाम से भी जाना जाता है। तभी तो इस व्रत में करक मतलब करवा का उपयोग होता है। इस पूजा के समय करवा बहुत जरुरी होता है। और पूजा के बाद इसे किसी ब्राह्मण या योग्य महिला को दान दे दिया जाता है। करवाचौथ दक्षिणी भारत की तुलना में उत्तरी भारत में ज्यादा प्रसिद्ध है। करवा चौथ के चार दिन बाद पुत्रों की दीर्घ आयु और समृद्धि के लिए अहोई अष्टमी व्रत किया जाता है। इसबार करवाचौथ 19 अक्टूबर को मनाया जाएगा।  हमारी कामना है की सभी महिलाओ के लिए यह दिन उल्लास और खुशियो से भरा हुआ हो और साथ ही उनके मन की कामना पूर्ण हो।  अरे हाँ इस ख़ास मौके पर अपने पति के साथ सेल्फी लेना ना भूल जाए।

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