करवाचौथ: इन 3 स्थितियों में भूल से भी न रखे निर्जला और निराहार व्रत

इस साल 24 अक्टूबर को करवाचौथ का पर्व है। यह पर्व हर साल कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। यह वही दिन है जब सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र की कामना के साथ निर्जला और निराहार व्रत रखती हैं। वहीं शाम को शिव परिवार का पूजन करती हैं, और इसके बाद चंद्र दर्शन करके अर्घ्य देती हैं। वहीं अंत में अपने पति के हाथों से पानी पीकर अपना व्रत खोलती हैं। हालाँकि आज हम आपको बताने जा रहे हैं उन महिलाओं के बारे में जिन्हे भूल से भी भूखा और प्यासा नहीं रहना चाहिए क्योंकि इस व्रत को रखने से उनकी परेशानी बढ़ सकती है। आइए जानते हैं कीन्हे नहीं रखना चाहिए निर्जला और निराहार व्रत। 


डायबिटीज- पहले महिलाएं डायबिटीज की रोगी होने के बाद भी करवाचौथ का व्रत रखती थीं और आज भी कई महिलाएं ऐसा करती हैं, लेकिन ऐसा करने से परिणाम गंभीर भी हो सकते हैं। जी दरअसल डायबिटीज के मरीजों के लिए देर तक भूखा या प्यासा रहना ठीक नहीं होता। डॉक्टर्स के अनुसार लंबे समय तक भूखे रहने से ब्लड शुगर का स्तर घट या बढ़ सकता है। ऐसा होने से हाइपोग्लाइसेमिया या हाइपरग्लाइसेमिया का खतरा हो सकता है। इसी के चलते डायबिटीज से ग्रसित महिलाओं को ये व्रत नहीं रहना चाहिए।

गर्भावस्था- कहा जाता है गर्भावस्था के दौरान एक महिला के शरीर को ज्यादा पोषण की जरूरत होती है। केवल यही नहीं बल्कि उसके बच्चे का विकास भी उसी के जरिए होता है। इसी के चलते करवाचौथ का व्रत रखने से महिला और बच्चे ​दोनों के लिए समस्या पैदा हो सकती है। वहीं पहली और तिमाही में व्रत रखना ज्यादा खतरनाक माना जाता है।

असंतुलित ब्लड प्रेशर- कुछ लोगों का ब्लड प्रेशर असंतुलित होता है, जो कभी बढ़ जाता है तो कभी घट जाता है। ऐसे लोगों को भी करवाचौथ का व्रत नहीं रखना चाहिए क्योंकि लंबे समय तक भूखे रहने से ऐसी महिलाओं के ब्लड प्रेशर के स्तर में उतार-चढ़ाव की स्थिति पैदा हो सकती है, और इसके चलते उनकी तबियत खराब हो सकती है।

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