करुणानिधि का निधन: पटकथा लेखन से सफर शुरू कर बने थे राजनीती के शहंशाह

करुणानिधि का निधन:  पटकथा लेखन से सफर शुरू कर बने थे राजनीती के शहंशाह

चेन्नई। चेन्नई के कावेरी हॉस्पिटल में जिंदगी और मौत से लड़ रहे DMK प्रमुख एम करुणानिधि का निधन हो गया है। उनकी उम्र 94 साल थी और उन्होंने 26 जुलाई को ही डीएमके प्रमुख के रूप में 50 साल पूरे किये थे। उन्हें अस्पताल में एडमिट करने के बाद से ही अस्पताल के बाहर उनके समर्थको की भारी भीड़ उमड़ चुकी थी। उनकी मौत की खबर के बाद से पूरा चेन्नई सदमे में है। और हॉस्पिटल के बहार लोगों का रो-रो कर बुरा हाल हो चूका है। 

करुणानिधि के महत्वपूर्ण अंगो ने काम करना किया बंद...

गौरतलब है कि करूणानिधि ने राजनीति में आने से पहले तमिलनाडु की फिल्मों में बतौर पटकथा लेखक का काम किया था। उन्हें संगीत का बहुत शौक था, परन्तु उन्हें उनकी जाती की वजह से कम वाघयंत्र सिखाये जाते थे। यह बात उनके दिल पर लग गई और तब से ही वो राजनीति में आने के सपने देखने लगे थे। 

दो पत्नियों के साथ रहते हैं करुणानिधि
सबसे पहले वे  'पेरियार' के 'आत्मसम्मान आंदोलन' से जुड़े और फिर द्रविड़ लोगों के 'आर्यन ब्राह्मणवाद' के खिलाफ आंदोलन में शामिल हो गये। इसके बाद वे कड़ी मेहनत और समाजसेवी सोच की वजह से वो आगे चल कर राजनीतिक दल द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम (डीएमके) के प्रमुख बने। वे 1969 में डीएमके के संस्थापक सी. एन. अन्नादुरई की मौत के बाद से इसके नेता हैं और पांच बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं।  

करूणानिधि की हालत गंभीर, चेन्नई रवाना होंगी ममता

करुणानिधि की सख्शियत की एक ख़ास बात ये है पिछले वे पिछले 62 सालों में एक भी चुनाव नहीं हारे थे। 1924 में थिरुक्कुवालाई गांव में जन्में करुणानिधि का घर अब म्यूजियम में बदल दिया गया है। जहां उनकी पोप से लेकर इंदिरा गांधी तक के साथ की तस्वीरें लगी हैं।  दक्षिण भारत की राजनीति में तस्वीरों की जगह बहुत ऊपर है. करुणानिधि का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था।  लेकिन बालक करुणानिधि पढ़ने में बहुत तेज था। 

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