कर्नाटक चुनाव या युद्ध...

देश के कर्नाटक राज्य में गर्म रहा चुनाव का माहौल अब ख़त्म हो चूका है, कर्नाटक में आज यानि शनिवार को 6 बजे तक वोटिंग जारी रहेगी जिसके बाद  जिसके बाद 15 मई को इसके परिणाम आने है, 223 सीटों पर होने वाले चुनाव में इस बार जहाँ कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गाँधी एक अलग ही मिजाज में नजर आए वहीं देश के प्रधानसाहब ने भी रैलियां करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी. 

कर्नाटक का इस बार का चुनाव पुरे समय रैलियों में उलझा रहा और मुद्दों से भटका दिखाई दिया, कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी हो या देश के सर्वोच्च पद पर आसीन नरेंद्र मोदी हो, दोनों चुनावों में सारा समय एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी करते रहे. बयानबाजी में एक समय ऐसा भी आया जब मोदी जी अपने पद की गरिमा को भी भूल गए और भाषण देते रहे. 

एक ओर जहाँ चुनाव में भाषणों ओर बयानबाजी का दौर चला वहीं दूसरी ओर जातियों के खेल में उलझा यह चुनाव कहीं से कहीं तक लग नहीं रहा था कि हम एक धर्म निरपेक्ष देश का हिस्सा है. जिन नेताओं को हम जातिवाद और असमानता दूर करने के लिए चुनते है वो अपने भाषणों और चुनावी रणनीतियों में बढ़ चढ़कर जातियों को बढ़ावा देकर बाँटने का काम करते है. 

कर्नाटक चुनाव में चल रही कैम्पेनिंग देखकर लग रहा था जैसे चुनाव नहीं कोई अखाड़ा हो जहाँ कांग्रेस और बीजेपी के दो पहलवान आपस में लड़ रहे हो, हालाँकि इस दौरान कई नेताओं के भाषण सुनकर थोड़ी शर्म जरूर आई, कि जिन नेताओं ने संविधान की शपथ लेकर इस पद की गरिमा का ख्याल रखने का वादा किया था उन्हीं नेता संविधान को शर्मसार करने से चूक नहीं रहे थे, ऐसे में आने वाले नेताओं से क्या उम्मीद लगाए यह तो देश का हर वर्ग आसानी से जान चूका होगा अगर अब भी नहीं जान पाए तो चीजों पर विचार कर उन्हें सोचे हो सकता है दिमाग थोड़ा अच्छे से चल निकले और इन नेताओं की रणनीति के बारे में पता चले. 

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