कर्नाटक: बीजेपी की कथनी-करनी और सवालात

कर्नाटक विधान सभा चुनावों में भी बीजेपी के नेता सुशासन और महिला सुरक्षा का वादा दोहराते हुए आगे बढ़ रहे है. हाल ही में महिला सुरक्षा को लेकर काफी चर्चा गर्म है. एक और बात है जिसका जिक्र बीजेपी लगातार कर रही है कांग्रेस के दागी विधायकों को टिकिट दिए जाने का. जिसको मुद्दा बना कर बीजेपी कांग्रेस को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रही. बीजेपी के दबाव के बाद कांग्रेस ने भी भूल सुधार के रूप में मेहुल चौकसी जैसे भगोड़े के वकील को दिया हुआ टिकिट वापिस छीन लिया. इसके साथ ही कांग्रेस अब हमलावर मोड में है.

क्योकि उम्मीदवारों की जारी सूची में बीजेपी के खेमे में भी कई ऐसे चेहरे शामिल है जिनके दामन पर पूर्व में लगे दाग फ़िलहाल धुले नहीं है. बीजेपी ने कई ऐसे चेहरों को कमान थमाने का फैसला किया है जो बीजेपी के नारे सुशासन और महिला सुरक्षा की पोल खोल रहे है. ऐसे कई नेता है जो विधानसभा तक की महिमा और गरिमा को धूमिल कर चुके है. 

ऐसे में बीजेपी इस सवाल पर हमेशा बैकफुट पर है कि क्यों? आखिर क्यों बीजेपी को इस माहौल में भी जहां उसका विजय रथ हर कही फतह हासिल कर रहा है, फिर भी  दागियों पर दांव खेलना पड़ रहा है?  सवाल खुद पर भरोसे और अपनी कथनी और करनी के अंतर दोनों का है. आखिर कैसे बीजेपी सदन में पोर्न फिल्म देखने वालों से महिला सुरक्षा करवा सकेगी और कैसे सदन की गरिमा को धूमिल करने वाले सुशासन के मंत्र की पवित्रता कायम रख सकेंगे ?

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