यहां जानें कजरी तीज का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Aug 28 2018 10:02 AM
यहां जानें कजरी तीज का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

जल्द ही श्री कृष्ण जन्माष्टमी आने वाली है जिसकी तैयारियों में लोग अभी से ही जुट गए हैं लेकिन श्री कृष्ण जन्माष्टमी से पहले कजरी तीज आती है जिसका काफी महत्व है. वैसे तो साल भर में कई तीज आती है लेकिन अखा तीज, हरियाली तीज, हरतालिका तीज और कजली तीज को सबसे ख़ास माना गया है. कजली तीज के दिन सुहागिन स्त्रियां व्रत रखती हैं और पति की लंबी आयुु के लिए तीज माता की पूजा करती है.

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ऐसा कहा जाता है कि व्रत को पूरा फल तब तक नहीं मिलता जब तक इस व्रत की कथा को पढ़ा न जाए इसलिए जो भी स्त्रियां व्रत रखती है पूरी विधि विधान के साथ रखती हैं. उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश समेत और भी कई राज्यों कजरी त्योहार बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है. तो चलिए जानते हैं कजरी तीज का शुभ मुहूर्त और समय साथ ही व्रत का महत्व.

कजरी तीज तिथि और मुहूर्त 

28 अगस्त 2018 को रात्रि 20:41:26 से तृतीया आरम्भ

29 अगस्त 2018 को रात्रि 21:40:13 पर तृतीया समाप्त

कजरी तीज का महत्व :

कजरी तीज का व्रत केवल सुहागिने औरतें रखती है, हालाँकि कुंवारियां लड़कियां भी इसकी कथा को सुन सकती है, भादों महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली तीज को कजरी तीज कहते हैं.

इस दिन स्त्रियां अपने हाथो में मेहँदी लगाती है और विशेष रूप से पूजा करती है. कजरी तीज का व्रत वैवाहिक जीवन में सुख समृद्धि लेकर आता है, लड़कियां अच्छे वर की कामना के लिए यह व्रत कर सकती है.

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इस व्रत में सुहागन महिलाएं और लड़कियां पानी नहीं पीती है. इस दिन हर घर में गेहूं, चना और जौ के सत्तू के लड्डू बनाई जाती है. कजरी व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना की जाती है. ऐसा कहा जाता है कि जो भी स्त्री कजरी व्रत पूरे विधि विधान के साथ करती है तो उससे भगवान शिव और माता पार्वती अधिक प्रसन्न होते हैं.

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