मैंने संगीत सीखने के लिए खूब पापड़ बेले.....

बॉलीवुड के जाने माने दिग्गज सिंगर कैलाश खेर जिनका जन्म उत्तरप्रदेश के मेरठ में हुआ है, कैलाश खेर को खासतौर पर देखा जाए तो उन्हें सूफी गायन के लिए जाना जाता है. कैलाश ने साल 2003 में बॉलीवुड के खिलाडी अक्षय कुमार, लारा दत्ता और प्रियंका चोपड़ा स्टारर फिल्म ‘अंदाज’ में उन्होंने पहला सॉन्ग ‘रब्बा इश्क न होवे’ गाया था, जो खूब चर्चित रहा. हालांकि, इसमें कैलाश के साथ सोनू निगम, अलका याग्निक और सपना मुखर्जी भी सिंगर्स थे. कैलाश को असली पहचान मिली 2003 में ही रिलीज हुई ‘वैसा भी होता है पार्ट 2’ में गाए सॉन्ग ‘अल्लाह के बंदे’ से. इस सॉन्ग ने कैलाश को रातोंरात बॉलीवुड के टॉप सिंगर्स की लिस्ट में खड़ा कर दिया|

इसके बाद उन्होंने ‘स्वदेश’ (2004), ‘काल’ (2005), ‘फना’ (2006), ‘आजा नच ले’ (2007), ‘चांदनी चौक टू चाइना’ (2009), ‘फंस गए रे ओबामा’ (2010), ‘गली-गली चोर है’ (2012), ‘लक्ष्मी’ (2014) और ‘देसी कट्टे’ (2014) जैसी फिल्मों में आवाज दी. आपको बता दे की कैलाश खेर को संगीत विरासत में मिला है. उनके पिता पंडिम मेहर सिंह खेर पुजारी थे और अक्सर घरों में होने वाले इवेंट में ट्रेडिशनल फोक गाया करते थे. कैलाश ने बचपन में पिता से ही संगीत की शिक्षा ली थी. अपनी इस चर्चा के दौरान कैलाश कहते हैं, "मैंने मात्र 13 साल की उम्र में अपना घर छोड़ दिया था|

घर छोड़ने के बाद आटा, तेल और नमक का मोल समझ आया. पढ़ाई और नौकरी दोनों का सामंजस्य करना बहुत मुश्किल था." संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहते हैं कि उस समय न तो पैसा था और न ही समय कि संगीत की शिक्षा किसी इंस्टिट्यूट से ले सकूं, लेकिन मैंने संगीत सीखने के लिए खूब पापड़ बेले. वो बताते हैं कि संगीत सीखने के लिए मेरे पास सिर्फ़ एक पुराना वॉकमैन और हेडफ़ोन था. उन दिनों कैसेट्स का ज़माना था. दिल्ली के पालिका बाजार से क्लासिकल संगीत के कैसेट्स मैं खूब खरीदता और फिर उन्हें काफी ध्यान से सुनता था|

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