गुरु रविदास जी की जयंती पर ज्योतिरादित्य सिंधिया बोले- 'उन्होंने समाज को सही रास्ता दिखाया'

Feb 28 2021 10:55 AM
गुरु रविदास जी की जयंती पर ज्योतिरादित्य सिंधिया बोले- 'उन्होंने  समाज को सही रास्ता दिखाया'

ग्वालियर: बीते कल प्रदेश में संत रविदास जी की जयंती मनाई गई। इस दौरान पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अजाक्स द्वारा संत सिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में अपने विचार व्यक्त किए। इस समारोह की अध्यक्षता सांसद विवेक नारायण शेजवलकर ने की। इस दौरान प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर भी अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। इस दौरान अजाक्स कार्यालय परिसर में संत शिरोमणि रविदास जी की प्रतिमा का अनावरण भी किया गया। बीते शनिवार को ठाठीपुर स्थित अजाक्स कार्यालय परिसर में आयोजित हुए कार्यक्रम में अतिथियों ने समाज के संतजन एवं समाज सेवियों को शॉल-श्रीफल एवं प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया।

इस दौरान राज्यसभा सांसद सिंधिया ने कहा, '600 साल से अधिक समय व्यतीत होने के बाबजूद संत रविदासजी के सिद्धांत एवं विचार आज भी प्रासंगिक हैं। वे केवल महान संत ही नहीं अपितु दर्शनशास्त्री एवं कवि भी थे। इतने सारे गुणों का समावेश होने से वे महान संत कहलाए और समाज को सही रास्ता दिखाया।' इसके अलावा सिंधिया ने यह भी कहा, 'संत रविदास ने संदेश दिया कि भगवान उसी के हृदय में निवास करते हैं जिसमें भेदभाव, द्वेष व लालच न हो। आत्मा शुद्ध हो। किसी के प्रति मन में नकारात्मक भाव न हों। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत को विश्व पटल पर ऊंचा उठाने के लिये दलितों एवं शोषित लोगों को राष्ट्र की मुख्यधारा में जोडऩे का काम कर रहे हैं।

यही संकल्प हम सबका होना चाहिए। प्रतिस्पर्धा के दौर में हम तभी मजबूत बनेंगे जब एक दूसरे का हाथ थामकर एक लड़ी के रूप में भारत माता की सेवा करेंगे। वर्तमान युग में शिक्षा ही सबसे बड़ा हथियार है। इसलिए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोग शिक्षित होकर प्रदेश एवं देश के भविष्य के शिल्पकार बनें, यही संत रविदास जी के प्रति सच्ची श्रृद्धांजलि होगी।' वहीं इस दौरान सांसद विवेक नारायण शेजवलकर ने कहा, 'भारतीय संस्कृति व मूल्यों के संरक्षण में संतों की सदैव से विशेष भूमिका रही है। इसीलिए तमाम बाहरी हमलों के बावजूद हमारी संस्कृति की ध्वजा आज भी फहरा रही है। संत रविदास जी उसी संत परंपरा के श्रेष्ठ संतों में से एक थे। संत रविदासजी ने समाज को भक्ति के साथ-साथ आध्यात्मिक मार्ग का पाठ पढ़ाया।'

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