आज है ज्येष्ठा गौरी पूजन व्रत, 3 दिनों तक होगी पूजा

हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को ज्येष्ठा गौरी पूजन व्रत किया जाता है। ऐसे में इस बार यह व्रत आज यानी 13 सितंबर सोमवार को पड़ रहा है। इस व्रत को बहुत कम घरों में मनाया जाता है। वहीँ सनातन संस्था के अनुसार असुरों से पीड़ित सर्व स्त्रियां श्री महालक्ष्मी गौरी की शरण में गईं और उन्होंने अपना सुहाग अक्षय करने के लिए उनसे प्रार्थना की। ऐसे में श्री महालक्ष्मी गौरी ने भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर असुरों का संहार किया और अपने शरण में आईं स्त्रियों के पतियों को तथा पृथ्वी के प्राणियों को सुख का वरदान दिया। इसी के चलते अखंड सुहाग की प्राप्ति के लिए स्त्रियां ज्येष्ठा गौरी का व्रत करती हैं।

आपको बता दें कि यह व्रत तीन दिनों का होता है। जी हाँ और प्रांत भेदानुसार यह व्रत करने की विविध पद्धतियां हैं। इनमे धातु या मिट्टी की प्रतिमा बनाकर अथवा कागज पर श्री लक्ष्मी का चित्र बनाकर उस चित्र का, तथा कई स्थानों पर नदी के तट से पांच कंकड़ लाकर उनका गौरी के रूप में पूजन किया जाता है। इस पर्व को अधिकतर महाराष्ट्र में मनाया जाता है। यहाँ अधिकतर स्थानों पर पांच छोटे मिट्टी के घडे एक के ऊपर एक रखकर उस पर मिट्टी से बना गौरी का मुखौटा रखते हैं।

वहीँ कुछ स्थानों पर सुगंधित फूल देने वाली वनस्पतियों के पौधे अथवा गुलमेहंदी के पौधे एकत्र कर बांधकर उनकी प्रतिमा बनाते हैं और उस पर मिट्टी से बना मुखौटा चढ़ाते हैं। केवल यही नहीं बल्कि उस मूर्ति को साड़ी पहनाकर अलंकारों से सजाते भी हैं। यहाँ गौरी की स्थापना के दूसरे दिन उनका पूजन कर नैवेद्य चढ़ाया जाता है। वहीँ आखिरी और तीसरे दिन गौरी का नदी में विसर्जन करते हैं। वहीँ विसर्जन के बाद लौटते समय उस नदी की रेत अथवा मिट्टी घर लाकर पूरे घर में छिड़कते हैं।

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