नूपुर शर्मा को लताड़ लगाने वाले जज पारदीवाला को वापस लेना पड़ी थी अपनी विवादित टिप्पणी

नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय की तरफ से विगत शुक्रवार को भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा को कड़ी फटकार लगाई गई थी। शीर्ष अदालत की तरफ से अपनी मौखिक टिप्पणी में कहा गया था कि जिस प्रकार से पूरे देश में भावनाएं भड़की हैं और जो कुछ हो रहा है उसके पीछे नूपुर शर्मा का बयान ही जिम्‍मेदार है। दरअसल, शुक्रवार को नूपुर शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा गया कि जिस तरह से उन्होंने टिप्पणी की और बाद में कहा कि वो एक वकील हैं, ये सब शर्मनाक है।

यही नहीं जस्टिस जे.बी. पारदीवाला ने कहा कि उदयपुर की घटना (कन्हैयालाल की नृशंस हत्या) के लिए भी नूपुर शर्मा का बयान ही जिम्‍मेदार है। जे.बी. पारदीवाला इसी साल मई के महीने सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस के रूप में शपथ ग्रहण की थी। बता दें कि इससे पहले पारदीवाला, गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। बतौर जज उनकी पहले भी कुछ टिप्पणियां ऐसी थी, जो काफी विवादों में रहीं। कोरोना काल के दौरान की गई टिप्पणी उनमें से एक है। दरअसल, आरक्षण को लेकर की गई एक टिप्पणी पर साल 2015 में 58 सदस्यों ने राज्यसभा के तत्कालीन सभापति और उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी से न्यायमूर्ति पारदीवाला के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया आरंभ करने की मांग की थी।

अनुसूचित जाति और जनजाति को लेकर जस्टिस पारदीवाला ने कहे थे अपशब्द :-

वर्ष 2015 में 58 राज्यसभा सांसदों ने गुजरात उच्च न्यायालय के तत्कालीन जज जे.बी. पारदीवाला के विरुद्ध महाभियोग प्रस्ताव लाया था। यह प्रस्ताव उनकी तरफ से आरक्षण प्र दी गई टिप्पणी के विरुद्ध था। सांसदों ने कहा था कि जस्टिस पारदीवाला ने अनुसूचित जाति और जनजाति को लेकर अपशब्द कहे हैं। जस्टिस पारदीवाला ने आरक्षण को देश को बर्बाद करने वाला बताया था। जिसके बाद तत्कालीन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के पास महाभियोग का नोटिस जाने के बाद जज ने अपने आदेश में से वह टिप्पणी हटा ली थी। बता दें कि, जस्टिस पारदीवाला के पिता बुरजोरजी कावसजी पारदीवाला, कांग्रेस के विधायक भी रह चुके हैं। 

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