बड़े ही कोमल ह्रदय थे इंदिरा गांधी से टक्कर लेने वाले जयप्रकाश नारायण, पढ़ें ये अनसुना किस्सा

नई दिल्ली: समाजवाद के पुरोधा लोकनायक जयप्रकाश नारायण को अपने जेपी आंदोलन के नाम से जाना जाता है, जिसमे उन्होंने इंदिरा गाँधी की इमरजेंसी का विरोध किया था। लेकिन वास्तव में वे बड़े ही कोमल ह्रदय इंसान थे, इसका एक किस्सा हम आपको सुनाने जा रहे हैं। दरअसल जेपी का पैतृक गांव, बलिया जिले के पूर्वी छोर पर स्थित सिताब दियारा के जयप्रकाश नगर है। जहां जेपी हमेशा अपने लोगों से मिलने जुलने आया करते थे। उन्हें सबको सम्मान, विकास, शिक्षा की चिंता हुआ करती थी। साल 1972 में एक बार जयप्रकाश नारायण समस्तीपुर जिले में थे और उनकी गांव आने की इच्छा हुई। वे वहां से गांव के लिए रवाना हो गए।

छपरा तक ट्रेन से आए फिर वहां से रिविलगंज पहुंच सरयू नदी पार की। किसी वजह से उन्हें ले जाने के लिए आने वाला हाथी नहीं आया था, लेकिन सामान ले जाने के लिए बैलगाड़ी मौजूद थी। बैलगाड़ी चालक चैन छपरा का रहने वाला रमन यादव सब सामान उठाकर बैलगाड़ी पर रखने लगा। अब जेपी का इंतजार करना उसे अच्छा नहीं लगा तो विनम्रता पूर्वक उनसे अनुरोध करते हुए बोला कि साहब आपको दिक्कत ना हो तो, बैलगाड़ी पर बैठकर हम खूब आराम से आपको गांव पहुंचा देंगे। 

उसका अनुरोध सुन जेपी व उनकी पत्नी प्रभावती देवी बैलगाड़ी पर सवार हो गए। कुछ दूर आने पर महावत हाथी लेकर रास्ते में मिल गया और उनसे हाथी पर चलने के लिए अनुनय विनय करने लगा, मगर जेपी और उनकी पत्नी ने बैलगाड़ी चालक के हृदय को आघात न पहुंचे, इसलिए बैलगाड़ी से नहीं उतरे और हाथी को वापस जाने का कह दिया।

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