जानिए, आखिर क्यों जयललिता का दाह संस्‍कार करने के बजाय दफनाया गया?

चेन्नई: 75 दिन चेन्नई के अपोलो अस्पताल में एडमिट रहने के बाद तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने सोमवार काे रात करीब 11:30 बजे अंतिम सांस ली। इसके बाद मंगलवार काे उनके पार्थिव शरीर काे MGR मैमोरियल मरीना बीच पर सुपुर्दे खाक किया गया। 

बता दें, हिंदू होने के नाते उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीति रिवाजों से किया जाना था। ख़बरों के मुताबिक, बताया जा रहा है कि जयललिता के अंतिम संस्कार को लेकर एआईएडीएमके नेताओं में भ्रम की स्थिति थी। जिसके बाद पार्टी के उच्च पदाधिकारियों ने तय किया कि जयललिता के शव को पूर्व सीएम एमजी रामाचंद्रन की ही तरह दफनाया जाएगा और उनकी समाधि ठीक उनके बगल में होगी।

गौरतलब है कि जयललिता नियमित रूप से प्रार्थना करती थी और माथे पर अक्‍सर आयंगर नमम लगाती थी। इधर, जयललिता को दफनाने के फैसले पर एक वरिष्‍ठ सरकारी सचिव ने कहा, वह हमारे लिए आयंगर नहीं थीं। असली मायनों में वह किसी जाति और धार्मिक पहचान से परे थीं।

यहां तक कि पेरियार, अन्‍ना दुरई और एमजीआर जैसे ज्‍यादातर द्रविड़ नेता दफनाए गए थे। हमारे पास उनके शरीर का दाह-संस्‍कार करने की कोई मिसाल नहीं है। तो, हम उन्‍हें चंदन और गुलाब जल के साथ दफनाते हैं। साथ ही पूर्व नेताओं को दफनाए जाने से समर्थकों को एक स्‍मारक के तौर पर उन्‍हें याद रखने में सहायता होती है।

राजकीय सम्मान के साथ हुआ 'अम्मा' का अंतिम संस्कार

 

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