नेताजी का खजाना गायब करने वाले को नेहरू ने दिया था पुरस्कार

Feb 05 2016 11:44 AM
नेताजी का खजाना गायब करने वाले को नेहरू ने दिया था पुरस्कार

नई दिल्ली : वर्ष 1951 से 1955 के बीच आज़ाद हिंद फौज का खजाना चुराया गया था। जब इस बात की जानकारी भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को मिली तो उन्होंने इसे दूसरे ही तरह से डील किया था। यह बात नेताजी सुभाषचंद्र बोस को लेकर दस्तावेज सार्वजनिक करने के बाद सामने आई। नेशनल आकाईव की गोपनीय फाईलों से जानकारी मिली है कि खजाना चोरी होने को लेकर सरकार को नेताजी के दो पूर्व सहयोगियों पर उन्हें शक था।

उनमे से नेताजी के एक सहयोगी को पं. नेहरू की पंचवर्षीय योजना का कार्यक्रम का पब्लिसिटी एडवाईज़र बना दिया गया। आज़ाद हिंद फौज के खजाने को 7 लाख डाॅलर के बराबर आंका गया। आज़ाद हिंद फौज के खजाने के गबन को लेकर अनुज धर ने अपनी पुस्तक में उल्लेख किया है। वर्ष 2012 में इस पुस्तक का प्रकाशन हुआ। इस पुस्तक का नाम इंडियाज़ बिगेस्ट कवर अप रखा गया।

21 मई 1951 को केके चित्तूर ने नेताजी के इस सहयोगी पर शक भी जताया। दरअसल केके चित्तूर 1951 में टोक्यो मिशन के हेड थे। राष्ट्रमंडल मामलों के सचिव बीएन भट्टाचार्य को सुभाषचंद्र बोस के दो सहयोगियों प्राॅपेगैंडा मिनिस्टर एसए अय्यर और टोक्यों में आज़ाद हिंद फौज के हेड मुंगा रामामूर्ति को लेकर संदेह जताया गया है।

यही नहीं नेताजी के बारे में जो दस्तावेज मिले हैं। उनमें बड़े पैमाने पर हीरे, जूलरी, सोना और दूसरी कीमती सामग्री भी प्राप्त हुई है। इस मामले में दिलचस्प बात सामने आई है कि नेताजी का जो खजाना था उसका वज़न नेताजी के शरीर के भार से भी अधिक था। बाद में इन संदूकों का क्या हुआ यह जानकारी नहीं मिल पाई है।

मगर यह कहा जा रहा है कि नेताजी के खजाने के रहस्यमय तरीके से लापता हो जाने के लिए काम में आने वाले उनके सहयोगी को तत्कालीन भारत सरकार द्वारा सहयोग दिया गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री ने नेताजी के सहयोगी अय्यर का भारत लौटने पर गर्मजोशी से स्वागत किया। आजाद हिंद फौज के खजाने के गबन में अय्यर का नाम शामिल होने के बाद नेहरू ने 1953 में पंचवर्षीय योजना का प्रचारक सलाहकार बना दिया।