जन्माष्टमी पर अपने जीवन में अपना लें गीता के यह 5 उपदेश

Aug 23 2019 04:40 PM
जन्माष्टमी पर अपने जीवन में अपना लें गीता के यह 5 उपदेश

आप सभी को बता दें कि श्री कृष्णा का जन्मदिवस आज के दिन और कल के दिन दोनों दिन मनाया जाने वाला है. ऐसे में आज पूरा देश रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन यानी जन्माष्टमी मनाएगा और ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं गीता के पांच उपदेश जिससे आप सुखी और खुश रह सकते हैं. आइए जानते हैं जन्माष्टमी पर गीता के 5 शानदार उपदेश. 

1. कर्म करने में ही अधिकार है- गीता में भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि तेरा कर्म करने में ही अधिकार है, उसके फलों में कभी नहीं. अत: तू फल की इच्छा किए बिना कर्म किए जा. तेरी कर्म न करने में ही आसक्ति न हो. इसका अर्थ है कि मनुष्य को भविष्य की चिंता किए बगैर वर्तमान में रहते हुए सिर्फ अपने काम पर फोकस करना चाहिए. अगर, हम वर्तमान में मेहनत और लगन से काम करेंगे तो भविष्य में उसका फल मिलेगा.

2. जब द्वेष न करता हो : गीता में भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कोई अतिविशिष्ट काम बनाने पर हमें अति हर्षित होने से बचना चाहिए. ऐसा करने से गलती होने की आशंका बढ़ जाती है. हमें किसी दूसरे से जलन भी नहीं करनी चाहिए. 

3. कर्म है जरूरी : गीता में भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं हर मनुष्य के लिए धरती पर कोई न कोई काम मौजूद है, जो कि वह करने के लिए बाध्य है. प्रत्येक व्यक्ति में कोई न कोई खूबी जरूर होती है. बस जरूरत होती है अपने अंदर छिपे हुनर को पहचानकर काम करने की.

4. जो इंद्रियों को सिर्फ ऊपर से रोकता है : गीता में भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं ऐसा व्यक्ति जो अपनी इंद्रियों पर केवल ऊपर से नियंत्रण करने का दिखावा करता है और अंदर से उसका मन चलायमान रहता है, ऐसा व्यक्ति झूठा और कपटी कहलाता है.

5. परमात्मा को सच्चे मन से स्वीकारना : गीता में भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं जो व्यक्ति ईश्वर शक्ति को सच्चे मन से स्वीकार करता है और परमात्मा में पूरी आस्था रखता है भगवान उसका कभी बुरा नहीं होने देते.

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