जलियांवाला बाग बिल राज्यसभा से नहीं हो सका पारित

नई दिल्लीः केंद्र सरकार संसद के उपरी सदन यानि राज्यसभा में जलियांवाला बाग बिल नहीं पास करवा सकी। सरकार इस विधेयक को बिना चर्चा के पास करवाना चारती थी मगर कांग्रेस इसके लिए तैयार नहीं हुई। वह बिल के जरिये स्मारक के ट्रस्ट से कांग्रेस अध्यक्ष को हटाने का विरोध कर रही थी। टकराव की स्थिति बनते देख बिल को अगले सत्र तक के लिए टाल दिया गया। निचले सदन से यह विधेयक पहले ही पास हो चुका है। सरकार इस बिल के जरिये जलियांवाला बाग ट्रस्ट में बदलाव करना चाहती है जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष को हटाना भी शामिल है।

इसके साथ ही वह ट्रस्ट में शामिल विपक्ष के नेता की जगह विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी के नेता को इनमें शामिल करना चाहती है। ऊपरी सदन में बिल पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि यह बिल सरकार को किसी भी मनोनीत न्यासी का कार्यकाल बिना कारण बताए पांच साल की तय अवधि से पहले समाप्त करने का अधिकार भी देता है। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा ने इस पर आपत्ति जताई र्और बोले कि सरकार कांग्रेस अध्यक्ष को क्यों हटाना चाहती है।

देश की आजादी के आंदोलन की अगुआई कांग्रेस ने ही की थी। इसे स्वीकार करने में किसी को भी संकोच नहीं होना चाहिए। न ही ऐसा संशोधन होना चाहिए। सरकार को बड़ा दिल दिखाना चाहिए। सरकार की ओर से रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस को उत्तर दिया और कहा कि आजादी के आंदोलन में कांग्रेस के रोल को कोई कम नहीं कर रहा है। देश ने इसे देखा है। इस बदलाव को किसी दल से जोड़कर देखने के बजाय ट्रस्ट की संरचना से जोड़कर देखा जाना चाहिए। जलियांवाला बाग की शताब्दी वर्ष के महत्व को देखते हुए इसे पास करना चाहिए। वैसे भी किसी भी सरकारी ट्रस्ट में कोई पद सियासी दलों से जुड़ा नहीं होना चाहिए। अब यह बिल सरकार अगले सत्र में लाएगी। 

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