विरोध करने पर जैन समाज को ध्वस्त करने में नहीं लगेगा ज़्यादा समय : उद्धव

मुंबई : मुंबई में भयांदर समेत अन्य क्षेत्रों में मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के बाद इस मामले में विरोध की राजनीति तेज़ हो गई है। दरअसल जैन समाज के पर्यूषण महापर्व के दौरान मांस के विक्रय को प्रतिबंधित कर दिया गया था। जिसके बाद एमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन औवेसी ने अपना विरोध जताया। इसके बाद शिवसेना भी इस निर्णय को लेकर विरोध में उतर आई। शिवसेना के साथ मनसे और कांग्रेस ने भी मांस विक्रय पर रोक का विरोध किया है। 

मिली जानकारी के अनुसार एनसीपी प्रभुत्व वाली नगर पालिका ने अपने क्षेत्र में मांस के विक्रय का विरोध किया ऐसे में मुंबई से सटे क्षेत्रों में मांस के विक्रय को बंद कर दिया गया। मगर शिवसेना के प्रभुत्व वाले मुंबई में मांस के विक्रय की पाबंदी नहीं लगाई गई और इसी के साथ मुंबई से सटे भयांदर और अन्य क्षेत्रों में मांस के विक्रय को प्रतिबंधित किया गया। जिसका शिवसेना और अन्य दलों ने विरोध किया। जैन समाज द्वारा मांस विक्रय को प्रतिबंधित करने की मांग की गई।

ऐेसे में शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में कहा कि जैन समाज मुस्लिमों की तरह तुष्टिकरण के मार्ग पर न बढ़े। जो जैन समाज मांस विक्रय का विरोध करने में लगा है वह यह भूल रहा है कि 1992-93 के दंगों के समय मराठियों ने जैन और उनके व्यवसाय को बचाया था। मगर वे इस तरह की मांग करेंगे तो उनके साम्राज्य को ध्वस्त करने में अधिक समय नहीं लगेगा। सामना में लिखे गए लेख और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा दिए गए बयान पर जैन समाज के संत परम पूज्य तरूण सागर महाराज ने कहा कि उद्धव अपनी राजनीति करें मगर हमें नीति न सिखाऐं। 

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