ये बाबा खाते हैं पेड़ों की हरी पत्तियां और घास

छपरा : हम आपको यह घटना बिहार के छपरा जिले के पानापुर की बता रहे है, सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक शनिवार की देर शाम भू-समाधि में गए जयराम बाबा 12 घंटे बाद रविवार की दोपहर बाहर निकले तो रसौली का काली मंदिर परिसर जयकारे से गूंज उठा। बता दे की पूर्व में बाबा जयराम की राजधानी दिल्ली में अच्छा खासा व्यवसाय था तथा वहां पर उनकी फुटवेयर की अपनी दुकान थी। बाबा जयराम की उम्र अभी केवल 27 वर्ष है. वहां उन्होंने मकान भी बनवा लिया था, लेकिन दिल्ली का यह व्यवसाय उन्हें रास नहीं आया। दुकान और मकान को औने-पौने दाम पर बेच दिया और वर्ष 2011 में अपने पैतृक गांव पानापुर के रसौली गए।  उन्हें अन्न खाए चार साल हो गए हैं। वह पेड़ों की हरी पत्तियां और घास खाकर जिंदा हैं। 

यहां रविवार को बाबा को अचेत अवस्था (बेहोशी) से चेतन (होश) में लाने के लिए पानी पिलाया गया। आशीर्वाद लेने वालों का तांता लग लग गया। फिर भजन कीर्तन के साथ बाबा की समाधि के कार्यक्रम का समापन हुआ। इस दौरान वहां पर बढ़ी संख्या में लोगो की उपस्थिति दर्ज की गई व हर कोई बाबा जयराम की जयजयकार कर रहा था. तथा इस दौरान लोगो द्वारा भजन कीर्तन का दौर भी चल रहा था. 

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