बचपन से ही सामान्य बच्चों की तरह नहीं थे पद्म विभूषण और विश्व योग गुरु जग्गी वासुदेव

सितंबर 1957 में कर्नाटक के मैसूर में पेशे से एक चिकित्सक के घर में एक बेटे ने जन्म लिया। मगर कहानी में ट्विस्ट ये है कि सामान्य बच्चे की भांति उसका मन खेल-खिलौनों की जगह दुनिया तथा उसकी प्रकृति में अधिक रमा। अब वह अकसर वृक्ष की ऊंची डाल पर बैठकर बहती मनोरम हवाओं का आनंद लेता। तत्पश्चात, उसके बड़ा होने पर जैसे उसके लिए कुछ समय तक जंगल में रहना बड़ी सामान्य सी बात थी। वह कभी कभी अनायास ही गहरे ध्‍यान में चला जाता। यही बच्चा बड़ा होकर सद्गुरु के नाम से जाना गया। आज दुनिया इन सद्गुरु को जग्गी वासुदेव के नाम से भी जानती है। आज मतलब 03 सितंबर को उनका ही 64वां जन्मदिन है।  

11 वर्ष की आयु और कठिन योगों का अभ्यास:-
बताया जाता है सद्गुरु ने 11 वर्ष की छोटी और खेलने-कूदने वाली आयु में मुश्किल योगों का अभ्यास आरम्भ कर दिया था। तब से आज तक वे उनका नियमित तौर पर अभ्यास करते आ रहे हैं। उनकी स्कूली शिक्षा मैसूर के में ही हुई। फिर मैसूर के विश्वविद्यालस से उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में अध्ययन किया। 

कारोबार कर कमाया अच्छा पैसा:-
यूँ तो कॉलेज के दिनों में ही मोटर साइकिल की सवारी करना उन्हें बहुत अच्छा लगता था। वे डिनर के लिए अकसर अपने मित्रों के साथ मैसूर के पास चामुंडी हिल जाया करते थे। कॉलेज का अध्ययन पूरा करने के पश्चात् सद्गुरु ने कई प्रकार के बिजनेस में भी अपनी किस्मत आज़माई, जिनमें पॉल्ट्री फार्म, ईंटे बनाने का काम भी सम्मिलित था। इन कामों से उन्होंने अच्छा रुपया भी कमाया। 

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