जान से गुज़र जाने तक..

िल के खामोशी से सांसों के ठहर जाने तक
याद आएगा मुझे शख्स वो मर जाने तक,
उसने उल्फत के भी पैमाने बना रखे हैं,
मेने चाहा था जिसे जान से गुज़र जाने तक....

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