अटकेगा पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगला देने का मामला

जयपुर : देश की शीर्ष अदालत द्वारा पुराने बंगलों में पूर्व मुख्यमंत्रियों के रहने को गलत मानने के फैसले के बाद अब राजस्थान में लागू पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगला देने और आजीवन कैबिनेट का दर्जा देने का मामला भी इससे प्रभावित हुए बिना नहीं रहेगा. इस कारण यह मामला अटकने की पूरी संभावना है.

उल्लेखनीय है कि राजस्थान में वसुंधरा राजे सरकार ने विधानसभा में गत वर्ष अप्रैल में पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगला देने और आजीवन कैबिनेट का दर्जा देने वाला बिल पारित भी हो गया था.तब विधानसभा में इस बिल का विरोध भाजपा के ही वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने करते हुए राजे पर इस कानून के माध्यम से दो हजार करोड़ रुपये के वर्तमान निवास पर आजीवन कब्जा करने का आरोप लगाया था. इस कानून के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में गत वर्ष ही याचिका दायर की गई थी और कोर्ट ने सरकार से जवाब-तलब भी किया था.तब सरकार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले का हवाला देकर फैसला आने के बाद जवाब देने की बात कही थी.

बता दें कि चूँकि अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला राजनेताओं के खिलाफ गया है इसलिए अब राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगला देने और आजीवन कैबिनेट का दर्जा देने के मामले का लागू होना संदिग्ध हो गया है. राजस्थान हाईकोर्ट में आगामी 28 मई को सुनवाई है.जिसमें राजस्थान सरकार अपना क्या पक्ष रखेगी इस पर सबकी नजरें लगी हुई हैं.राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया सरकारी आवास में रह रहे हैं, वहीं भैरोंसिंह शेखावत के जयपुर के बड़े सरकारी बंगले में उनके दामाद विधायक नरपत सिंह राजवी रह रहे हैं.वहीं दो बार मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत विधायक होने के बाद भी बड़ा बंगला इस्तेमाल कर रहे हैं.इन पर संकट के बादल छा गए हैं.

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